हेमंत शर्मा, इंदौर/धार। धार स्थित भोजशाला को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा 15 मई 2026 को दिए गए आदेश का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा अब तक पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया है। संगठन ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए स्पष्ट SOP और निर्देश जारी कराने की मांग उठाई है।

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष गोयल ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में भोजशाला को देवी वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर मानते हुए वहां संस्कृत भाषा, व्याकरण और साहित्य के अध्ययन-अनुसंधान को बढ़ावा देने की बात कही थी। इसके बावजूद आदेश के क्रियान्वयन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

ASI के आदेश के बाद भी नहीं बनी स्थिति स्पष्ट

पत्र में बताया गया है कि ASI नई दिल्ली द्वारा 16 मई 2026 को जारी आदेश में भोपाल मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद को जिला प्रशासन के सहयोग से हिंदू समाज की पूजा-अर्चना और शिक्षण गतिविधियों के लिए अनरिस्ट्रिक्टेड एक्सेस देने की बात कही गई थी। लेकिन आदेश जारी होने के लगभग एक महीने बाद भी इस संबंध में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश या SOP जारी नहीं किए गए हैं।संगठन का आरोप है कि इससे हिंदू समाज में भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी हुई है तथा लोगों को यह समझ नहीं आ रहा कि हाईकोर्ट के आदेशों का वास्तविक क्रियान्वयन किस स्तर पर हो रहा है।

ध्वज और प्रतिमा हटाने पर भी उठाए सवाल

पत्र में भोजशाला परिसर में लगाए गए ध्वज और वाग्देवी की प्रतिमा को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने पूछा है कि यदि 17 मई को ध्वज लगाया जाना गलत था तो उसे लगाया ही क्यों गया और यदि सही था तो बाद में हटाया क्यों गया।इसी प्रकार संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि वाग्देवी की प्रतिमा 6 जून को गर्भगृह में घंटों तक स्थापित रही। यदि यह कार्रवाई नियमों के विरुद्ध थी तो प्रतिमा स्थापित कैसे हुई और यदि सही थी तो बाद में उसे हटाया क्यों गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाधा डालने का आरोप

पत्र में दावा किया गया है कि संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए आयोजित कार्यक्रमों को भी रोकने का प्रयास किया गया। संगठन का कहना है कि इससे यह संदेश जा रहा है कि न्यायालय के आदेशों के अनुरूप गतिविधियों को लागू करने में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं।  हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने आरोप लगाया है कि ASI के महानिदेशक (DG) के आदेशों का पालन भोपाल और वार (धार) स्तर के अधिकारी नहीं कर रहे हैं। संगठन का दावा है कि स्थानीय अधिकारी हर निर्णय के लिए दिल्ली से निर्देश आने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे आदेशों के पालन में लगातार देरी हो रही है।

मुख्यमंत्री से मांगा हस्तक्षेप

पत्र में मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की गई है कि वे ASI को स्पष्ट और लिखित निर्देश जारी कराने के लिए पहल करें। संगठन का कहना है कि मौखिक आदेशों के बजाय लिखित SOP जारी होनी चाहिए, जिससे भ्रम की स्थिति समाप्त हो और वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ सके।हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने यह भी कहा है कि यदि जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो हिंदू समाज को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है। संगठन ने चेतावनी दी है कि भोजशाला मामले में न्यायालय के आदेशों के पालन को लेकर देशव्यापी अभियान और आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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