उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस 21 अगस्त से सामाजिक न्याय सम्मेलनों की शुरुआत करेगी. पहले चरण में लखनऊ, कानपुर और झांसी में सम्मेलन आयोजित कर दलितों और पिछड़ों को पार्टी से जोड़ने की कोशिश की जाएगी.
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की तैयारी में है. पार्टी अगले सप्ताह से सामाजिक न्याय सम्मेलनों का आयोजन शुरू करेगी, जिसकी शुरुआत 21 अगस्त को लखनऊ से होगी.
लखनऊ से शुरुआत
पहला सम्मेलन प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित किया जाएगा. इसमें प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और पिछड़ा वर्ग विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जयहिंद समेत अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे.
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सम्मेलन के जरिए दलितों और पिछड़ों को संविधान और आरक्षण के मुद्दे पर पार्टी से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा. कांग्रेस पिछले काफी समय से संविधान में बदलाव कर आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने के कथित प्रयासों को लेकर भाजपा पर निशाना साध रही है.
बसपा के जनाधार पर नजर
प्रदेश प्रभारी बनने के बाद राजेंद्र पाल गौतम बसपा के बिखरे जनाधार को कांग्रेस से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने पार्टी नेताओं को संकेत दिया है कि सत्ता में आने के लिए बसपा से दूरी बना रहे दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं को कांग्रेस के साथ जोड़ना होगा.
इसी रणनीति के तहत उन्होंने ‘जितनी आबादी उतना हक’ का नारा दिया है. कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर हर विधानसभा क्षेत्र में सम्मेलन आयोजित करने की रणनीति तैयार की है.
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तीन शहरों में सम्मेलन
पहले चरण में लखनऊ, कानपुर और झांसी में सम्मेलन कराने की रूपरेखा तय की गई है. 21 अगस्त को लखनऊ के बाद 22 अगस्त को कानपुर और 23 अगस्त को झांसी में सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे.
सम्मेलनों के आयोजन से पहले पार्टी ने छह सह प्रभारियों की नियुक्ति की है. इससे प्रदेश कार्यकारिणी के जल्द गठन के संकेत भी मिले हैं.
फिलहाल कांग्रेस सामाजिक न्याय सम्मेलनों के जरिए उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने की कोशिश करेगी. साथ ही बसपा से दूरी बना चुके और नाराज चल रहे अधिक से अधिक नेताओं को अपने साथ जोड़कर दलितों और पिछड़ों को साधने की रणनीति पर काम करेगी.
पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने बताया कि सम्मेलनों की तैयारी पूरी कर ली गई है.


