शब्बीर अहमद/संजय पाटीदार, भोपाल। स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को लेकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने पीएम मोदी के भाषण में मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र न होने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उन्हं पत्र लिखा है। वहीं इस मुद्दे पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने तीखा पलटवारी करत हुए कांग्रेस और आरिफ मसूद पर हमला बोला है।

आरिफ मसूद ने PM मोदी को लिखा पत्र, उठाए गंभीर सवाल

भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी का आरोप लगाया है। मसूद ने कहा कि आजादी किसी एक वर्ग की देन नहीं बल्कि सभी के सामूहिक बलिदान का परिणाम है। पीएम मोदी अपने भाषण में मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को भूल गए लेकिन देश को उनका त्याग याद है।

मसूद ने पत्र में 1857 की क्रांति, फकीर-सन्यासी आंदोलन और दिलावरजंग अहमदुल्ला शाह मदरासी के योगदान का विशेष उल्लेख किया गया है।

बड़े स्तर पर कार्यक्रम करने के ऐलान, वंदे मातरम पर दिया रूख

मसूद ने कहा कि वे देश के लिए कुर्बानी देने वाले मौलानाओं की याद में भोपाल में जल्द ही एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करेंगे। राहुल गांधी और सोनिया गांधी के वंदे मातरम वाले वीडियो पर मसूद ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम से किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, हमें भी इससे कोई आपत्ति नहीं है।

रामेश्वर शर्मा का तीखा पलटवार: “मुसलमानों का ताबीज टांगते-टांगते बूढ़ी हो गई कांग्रेस”

आरिफ मसूद के बयान और पत्र पर भाजपा के प्रखर विधायक रामेश्वर शर्मा ने कड़ा रुख अपनाते हुए करारा जवाब दिया। रामेश्वर शर्मा ने कहा कि देश की आजादी के लिए जब संघर्ष हुआ, तब धर्म या जाति के आधार पर आजादी नहीं मांगी गई थी। जो भी भारत माता के लिए लड़ा, वह पूजनीय है।

रामेश्वर ने कहा कि अशफाक उल्ला खान भारत के नौजवानों के आदर्श हैं। चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल और खुदीराम बोस की तरह अशफाक उल्ला खान की भी पूजा होती है। हम पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को भी पूजते हैं।

बीजेपी विधायक ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो भारत माता के टुकड़े करने की बात करेगा या देश से गद्दारी करेगा चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान उसका इलाज कानून के डंडे से होगा। उसे जेल में सड़ना पड़ेगा और फांसी तक जाना पड़ सकता है। उन्होंने मसूद को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे तय करें कि उन्हें ‘इलाज’ में जाना है या ‘वंदे मातरम’ में।

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