अंतरिम भरण-पोषण से जुड़े एक अहम मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) की धारा 24 के तहत वह पत्नी नौकरी करने और आय अर्जित करने की अवधि के लिए अंतरिम भरण-पोषण की हकदार नहीं होगी। कोर्ट ने कहा कि जिस अवधि में पत्नी स्वयं काम कर रही थी और कमाई कर रही थी, उस अवधि के लिए पति को भरण-पोषण देने का आदेश नहीं दिया जा सकता।
हाई कोर्ट ने पारिवारिक कोर्ट का आदेश बदला
न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति रेनू भटनागर की पीठ ने पारिवारिक अदालत के आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि पत्नी को 5,000 रुपये प्रति माह का अंतरिम भरण-पोषण केवल 1 जुलाई 2024 से दिया जाएगा। यह वह अवधि है जब वह बेरोजगार हुई।
पारिवारिक अदालत ने पति को 8 जनवरी 2021 से तलाक की कार्यवाही पूरी होने तक हर महीने 5,000 रुपये अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया था। पति ने इस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
बाटा शोरूम में करती थी नौकरी
मामले में सामने आया कि पत्नी ने अपने हलफनामे में स्वीकार किया था कि वह बाटा शोरूम में सेल्स हेल्पर के रूप में काम कर रही थी। उसने बताया था कि वह शनिवार और रविवार को काम करती थी और इसके लिए उसे करीब 7,000 रुपये प्रति माह मिलते थे। पत्नी ने बाद में बताया कि जून 2024 में उसे नौकरी से हटा दिया गया, क्योंकि शोरूम के मालिक को अब अतिरिक्त स्टाफ की आवश्यकता नहीं थी।
जनवरी 2021 से जून 2024 तक नहीं मिलेगा भरण-पोषण
हाई कोर्ट ने मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद कहा कि 8 जनवरी 2021 से जून 2024 तक, जब पत्नी नौकरी कर रही थी और आय अर्जित कर रही थी, वह अंतरिम भरण-पोषण की हकदार नहीं थी। कोर्ट के संशोधित आदेश के अनुसार, 1 जुलाई 2024 से 5,000 रुपये प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण दिया जाएगा।
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