शब्बीर अहमद, भोपाल। राजधानी भोपाल की आवासीय कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम द्वारा की जा रही कठोर कार्रवाई पर आखिरकार राज्य सरकार ने बड़ा ब्रेक लगा दिया है। रविवार को मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक हाईलेवल बैठक की। बैठक में मुख्य सचिव भी मौजूद रहे।

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बैठक में निर्णय लिया गया है कि फिलहाल नगर निगम भोपाल द्वारा दुकानदारों के खिलाफ कोई सख्त या कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अध्ययन और नीतिगत निर्णय के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन कर दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखेगी सरकार, 4 अगस्त को देनी है स्टेटस रिपोर्ट

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल के रहवासी इलाकों में चल रही कमर्शियल एक्टिविटी को लेकर नगर निगम से रिपोर्ट मांगी थी, जिसकी स्टेटस रिपोर्ट 4 अगस्त को कोर्ट में प्रस्तुत करनी है।

बैठक में तय हुआ कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखेगी। सरकार कोर्ट को बताएगी कि भोपाल के लिए मेट्रोपॉलिटन सिटी और भोपाल मास्टर प्लान जल्द लाया जा रहा है, जिससे व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों का स्थायी समाधान निकाला जा सकेगा।

एसीएस की अध्यक्षता में बनी कमेटी, ये होंगे सदस्य

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विधिक अध्ययन करने और व्यापारियों के हित में प्रक्रिया निर्धारित करने के लिए गठित समिति में निम्नलिखित अधिकारी शामिल किए गए हैं।

  • अपर मुख्य सचिव (ACS), नगरीय विकास एवं आवास विभाग- अध्यक्ष
  • अपर प्रमुख सचिव, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग (MSME)- सदस्य
  • सचिव, श्रम विभाग- सदस्य
  • आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास- सदस्य
  • महानिरीक्षक, पंजीयन एवं मुद्रांक- सदस्य
  • सदस्य सचिव, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल- सदस्य
  • उप सचिव, पर्यावरण विभाग- सदस्य
  • आयुक्त, नगर तथा ग्राम निवेश- सदस्य
  • भोपाल कलेक्टर एवं आयुक्त नगर निगम भोपाल- विशेष आमंत्रित सदस्य

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जब तक रिपोर्ट नहीं, तब तक कोई बुलडोजर या सीलिंग की कार्रवाई नहीं

यह समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों, व्यावहारिक कठिनाइयों और व्यापारियों के हितों का अध्ययन कर राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। शासन द्वारा इस रिपोर्ट पर विचार विमर्श कर नीति तय की जाएगी। जब तक नीतिगत प्रक्रिया तय नहीं हो जाती, तब तक नगर निगम भोपाल कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगा। इस फैसले से भोपाल के हजारों व्यापारियों और दुकानदारों ने बड़ी राहत की सांस ली है।

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