राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ा बाजार कर्ज लेने जा रही है। राज्य सरकार तीन अलग-अलग किश्तों में कुल 3,000 करोड़ रुपये का कर्ज उठाने की तैयारी में है। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक के मुंबई फोर्ट ऑफिस के माध्यम से कोर बैंकिंग प्रणाली यानी ‘ई-कुबेर’ सिस्टम के जरिए 6 अक्टूबर को देशभर की वित्तीय संस्थाओं से प्रस्ताव  आमंत्रित किए गए हैं।

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तीन चरणों में मिलेगा कर्ज, 7 अक्टूबर को फाइनल होगी बिड

वित्तीय संस्थाओं से प्राप्त सभी प्रस्तावों को 7 अक्टूबर को खोला जाएगा। जो बिडर राज्य सरकार की शर्तों के अनुकूल सबसे कम ब्याज दर पर कर्ज देने को तैयार होगा, उससे सरकार यह राशि लेगी। यह पूरी राशि तीन अलग-अलग समयावधि के लिए ली जा रही है:

पहला 1,000 करोड़ रुपये: यह कर्ज 10 वर्षों के लिए होगा, जिसे 7 अक्टूबर को ही लिया जाएगा और इसकी अदायगी 7 अक्टूबर 2036 को की जाएगी।

दूसरा 1,000 करोड़ रुपये: यह कर्ज 18 वर्षों की अवधि के लिए रहेगा, जिसकी अदायगी राज्य सरकार 8 जुलाई 2044 को करेगी।

तीसरा 1,000 करोड़ रुपये: यह कर्ज सबसे लंबी यानी 30 वर्षों की अवधि के लिए लिया जाएगा, जिसे राज्य सरकार 2 सितंबर 2056 को चुकाएगी।

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मध्य प्रदेश पर पहले से है करीब 4.88 लाख करोड़ का कर्ज

मध्य प्रदेश की वर्तमान वित्तीय स्थिति पर नजर डालें तो राज्य सरकार पर पहले से ही करीब 4 लाख 88 हजार 714 करोड़ रुपये का विशाल कर्ज बकाया है। इसमें से अकेले बाजार से लिया गया कर्ज ही 3 लाख 33 हजार 278 करोड़ रुपये का है। ऐसे में 3 हजार करोड़ रुपये का यह नया लोन राज्य के खजाने और आने वाली पीढ़ियों पर कर्ज का बोझ और बढ़ाएगा।

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