कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा की कानून-व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त बताते हुए आरोप लगाया है कि प्रदेश में जनप्रतिनिधि भी सुरक्षित नहीं हैं और अपराधी विदेश से गैंग चला रहे हैं।

चंडीगढ़। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था की बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सूबे की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया है। हुड्डा ने दोटूक शब्दों में कहा कि हरियाणा में अपराध का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है और मौजूदा सरकार कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालने में पूरी तरह नाकाम साबित हो चुकी है। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आज जब राज्य में जनप्रतिनिधि और राजनेता ही सुरक्षित नहीं हैं, तो ऐसे माहौल में आम नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल उठना बिल्कुल स्वाभाविक है। सरकार का अपराधियों पर से नियंत्रण पूरी तरह खत्म हो चुका है और आम आदमी भय के साए में जी रहा है।

विदेश से चल रहा है गैंग

रोहतक के महम से कांग्रेस विधायक बलराम डांगी के कार्यालय पर हाल ही में हुई ताबड़तोड़ फायरिंग की वारदात का विशेष रूप से जिक्र करते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने कहा कि इस पूरी आपराधिक वारदात के पीछे देश से बाहर यानी विदेशों से संचालित होने वाले एक बड़े गैंग का हाथ है। पूर्व मुख्यमंत्री ने खुलासा करते हुए कहा कि थाईलैंड में बैठे मुख्य अपराधी अपने स्थानीय गुर्गों के जरिए पूरे हरियाणा प्रदेश में दहशत का माहौल पैदा करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में अब तक एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।

मुख्यमंत्री और नीट पर कटाक्ष

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की कार्यशैली पर भी तीखा राजनीतिक व्यंग्य कसा है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि राज्य सरकार का पूरा ध्यान प्रदेश की मूल समस्याओं से पूरी तरह हट चुका है और वह जनता के असल मुद्दों पर रत्ती भर भी गंभीर नहीं है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि मुख्यमंत्री रात को पगड़ी बांधकर सोते हैं और सुबह होते ही अपना रुख पंजाब की तरफ कर लेते हैं, उन्हें हरियाणा के हितों की कोई चिंता नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने नीट परीक्षा के पेपर लीक मामलों में बार-बार हरियाणा का नाम आने को सरकार की सबसे बड़ी प्रशासनिक विफलता करार दिया है।