कुंदन कुमार, पटना। वर्षों से बकाया राशि और उस पर चढ़ते ब्याज के बोझ से परेशान ईंट भट्ठा कारोबारियों को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है। सरकार ने वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) के तहत बकाया राशि के निपटारे का रास्ता साफ कर दिया है। इसके तहत करीब 6 हजार ईंट भट्ठा संचालकों को बकाया की मूल राशि एकमुश्त जमा करनी होगी, जबकि वर्षों से देय ब्याज को माफ कर दिया जाएगा। इस प्रक्रिया से विभाग को करीब 289 करोड़ 38 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने शुक्रवार को अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी।

सरकार के कोष में जमा करनी होगी मूल बकाया राशि

मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि ईंट भट्ठा कारोबारियों के प्रतिनिधियों के साथ बकाया राशि के समाधान को लेकर कई दौर की बैठकें हुई थीं। कारोबारियों की ओर से लंबे समय से एकमुश्त भुगतान की व्यवस्था करने की मांग की जा रही थी। मामले को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाए जाने के बाद हाल में हुई कैबिनेट बैठक में ओटीएस के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत संबंधित कारोबारियों को 21 सितंबर से 20 दिसंबर तक की निर्धारित अवधि में मूल बकाया राशि एकमुश्त सरकार के कोष में जमा करनी होगी।

निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने वाले ईंट भट्ठा संचालकों को पूर्व व्यवस्था के तहत बकाया राशि ब्याज सहित जमा करनी होगी। सरकार का उद्देश्य वर्षों से लंबित राजस्व की वसूली के साथ कारोबारियों को ब्याज के अतिरिक्त वित्तीय बोझ से राहत देना है। मंत्री ने कहा कि इससे ईंट भट्ठा कारोबार से जुड़े लोगों को पुराने बकाये के कारण होने वाली परेशानियों से भी राहत मिलेगी।

जिग-जैग तकनीक से प्रदूषण नियंत्रण

मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि बिहार में ईंट भट्ठा उद्योग को पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में भी काम हुआ है। ईंट निर्माता संघ से जुड़े कारोबारियों ने जिग-जैग तकनीक अपनायी है। इस तकनीक से भट्ठों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। अवैध रूप से संचालित ईंट भट्ठों के संबंध में उन्होंने कहा कि नियमों के विरुद्ध संचालन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

खनन प्रभावित प्रखंडों पर खर्च होगी 70 फीसदी राशि

मौके पर मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) की राशि के इस्तेमाल में किए गए बदलाव की भी जानकारी दी। अब डीएमएफ की 70 फीसदी राशि उस प्रखंड में खर्च की जाएगी, जहां से खनिज का खनन हो रहा है, जबकि 30 फीसदी राशि जिले के अन्य प्रखंडों में खर्च होगी। पहले यह अनुपात 60:40 था। इसके साथ ही संबंधित जिले के सांसदों, विधान परिषदों और विधायकों को भी जिला खनिज फाउंडेशन की सदस्यता दी गई है। सरकार के अनुसार, जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।

नवादा और शेखपुरा में पत्थर खनन ब्लॉक की हुई नीलामी

मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि पत्थर खनन को गति देने के लिए विभिन्न जिलों में ब्लॉकों की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। नवादा और शेखपुरा में ब्लॉकों की नीलामी हो चुकी है। अन्य जिलों में भी जल्द प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है। खनिज क्षेत्र से जुड़े विषयों पर 22 सितंबर को जीएसआई के साथ बैठक प्रस्तावित है।

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