पटना। बिहार में 1799 दारोगा पदों पर बहाली के लिए आयोजित मेंस परीक्षा को लेकर उठे सवालों के बीच अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने जांच शुरू कर दी है। बिहार सरकार के निर्देश के बाद ईओयू ने परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के आरोपों की पड़ताल शुरू की है। मामले को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से सामने रखे गए साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। इसी बीच गृह विभाग के आदेश पर बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) ने दारोगा भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण यानी शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) को स्थगित कर दिया है। आयोग ने पहले सितंबर-अक्टूबर में फिजिकल टेस्ट कराने की तैयारी की थी और 12 अगस्त को इसकी घोषणा भी की गई थी। अब पेपर लीक और परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच के चलते आगे की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है।

मुख्यमंत्री से की गई थी शिकायत

मेंस परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े और पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई थी। प्रतिनिधिमंडल ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की थी। इसके बाद सरकार के स्तर से मामले को गंभीरता से लेते हुए ईओयू को जांच की जिम्मेदारी दी गई।

अभ्यर्थियों ने दिए तीन अहम साक्ष्य

अभ्यर्थियों की ओर से ईओयू और हाईकोर्ट के सामने कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य रखे गए हैं। इनमें पुलिस की जब्ती सूची में शामिल मोबाइल फोन से ली गई तस्वीरों की SHA-256 हैश वैल्यू, GPS लोकेशन और टाइम-स्टैम्प का उल्लेख शामिल है।

दूसरा महत्वपूर्ण साक्ष्य वायरल प्रश्न-पुस्तिका की तस्वीरों से जुड़ा है। तस्वीरों में प्रश्न-पत्र के साथ रखी ओएमआर शीट खाली दिखाई दे रही है। इससे यह सवाल उठाया गया है कि क्या परीक्षा के दौरान ही प्रश्न-पत्र की तस्वीरें खींची गई थीं।

इसके अलावा गिरफ्तार वीक्षक मृत्युंजय कुमार के बयान को भी जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। बताया गया है कि उसने रूम नंबर 23 में जाकर पेपर क्रमांक 22532773 और 22532780 की तस्वीर खींचने की बात स्वीकार की थी।

अन्य परीक्षाओं की भी जांच

ईओयू अब रीनीट, एईडीओ और हवलदार इंस्ट्रक्टर परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामलों में गिरफ्तार किए गए बायोमेट्रिक स्टाफ और सुपरवाइजर की भूमिका की भी जांच करेगी। जरूरत पड़ने पर इन आरोपियों को रिमांड पर लेकर दोबारा पूछताछ की जाएगी।
जांच एजेंसी अभ्यर्थियों की ओर से उपलब्ध कराए गए सभी साक्ष्यों की तकनीकी और तथ्यात्मक जांच करेगी। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई और दारोगा भर्ती प्रक्रिया को लेकर फैसला लिया जा सकता है।