सोहराब आलम, मोतिहारी। बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संघ के बैनर तले आज एक बार फिर से राज्यभर में आक्रोश और विरोध के स्वर गूंज उठे। इसी कड़ी में पूर्वी चंपारण जिले के मुख्यालय मोतिहारी में भी हजारों की संख्या में डाटा एंट्री ऑपरेटर्स सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध मार्च निकाला। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक उपेक्षा और अपनी लंबे समय से लंबित न्यायसंगत मांगों को सरकार तक पहुंचाना था।
मोतिहारी में निकाले गए इस विशाल विरोध मार्च की अगुवाई और अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष संतोष कुमार ने की। प्रदर्शन के दौरान ऑपरेटरों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और अपनी कार्यकुशलता का हवाला देते हुए स्थायी रोजगार की सुरक्षा की पुरजोर मांग की।
दो दशकों से चल रहा है संघर्ष
मीडिया से बातचीत करते हुए संघ के अध्यक्ष संतोष कुमार ने सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूरे बिहार के डाटा एंट्री ऑपरेटर पिछले लगभग 20 वर्षों से लगातार अपनी सेवा को नियमित करने और स्थायी कर्मी का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे हैं। इतने लंबे अंतराल में कई बार सरकार के प्रतिनिधियों से वार्ता हुई और आश्वासन भी मिले, लेकिन ज़मीनी स्तर पर सरकार ने अब तक कोई ठोस व सकारात्मक निर्णय नहीं लिया है। यही कारण है कि आज प्रदेश के ऑपरेटरों को अपनी रोजी-रोटी और भविष्य की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा है।


उग्र और अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
संघ के नेताओं ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अब भी समय रहते उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो यह विरोध प्रदर्शन केवल एक दिवसीय मार्च तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र, व्यापक और अनिश्चितकालीन रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। ऑपरेटरों का कहना है कि वे वर्षों से सरकारी कार्यालयों की रीढ़ बनकर निष्ठापूर्वक सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें केवल आश्वासन मिला है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

