कुंदन कुमार/​पटना: बिहार सरकार ने राज्य को प्रदूषण मुक्त और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में ‘बिहार इलेक्ट्रिक वाहन (संशोधन) नीति, 2026’ को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। इस नीति के जरिए सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक राज्य की सड़कों पर चलने वाले कुल नए वाहनों में से 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की सुनिश्चित करना है।

​परिवहन मंत्री का विजन और शिकायत निवारण

​कैबिनेट बैठक के बाद परिवहन मंत्री दामोदर रावत ने बताया कि सरकार का मुख्य फोकस डीजल और पेट्रोल की खपत को कम करना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री के विजन का हवाला देते हुए कहा कि मंत्रियों को भी वाहनों की संख्या कम करने की सलाह दी गई है। मंत्री रावत ने स्पष्ट किया कि परिवहन विभाग में पारदर्शिता लाई जाएगी और जनता की किसी भी शिकायत का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

​महिलाओं और आरक्षित वर्गों के लिए विशेष सौगात

​नई नीति में महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखा गया है। परिवहन सचिव राज कुमार के अनुसार, यदि कोई महिला इलेक्ट्रिक कार खरीदती है, तो उसे सरकार की ओर से 1 लाख रुपये का सीधा अनुदान मिलेगा। इसके अलावा, दोपहिया वाहनों की खरीद पर भी श्रेणीवार सहायता राशि तय की गई है:

  • ​दोपहिया वाहन: सामान्य वर्ग के लिए 10,000 रुपये, जबकि महिला और SC/ST वर्ग के लिए 12,000 रुपये की मदद।
  • ​मालवाहक तिपहिया: स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सामान्य वर्ग को 50,000 रुपये और SC/ST वर्ग को 60,000 रुपये का अनुदान दिया जाएगा।

​आर्थिक बचत और पर्यावरण संरक्षण

​सरकार का अनुमान है कि इस नीति के प्रभावी होने से 2030 तक बिहार में सालाना लगभग 10 करोड़ लीटर पेट्रोल-डीजल की बचत होगी। इससे न केवल कीमती विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि लाखों टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आने से बिहार की वायु गुणवत्ता (Air Quality) में भी क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा।

​इंफ्रास्ट्रक्चर और रियायतों का जाल

​EV को बढ़ावा देने के लिए सरकार केवल सब्सिडी ही नहीं, बल्कि अन्य सुविधाएं भी दे रही है। सभी नए इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स में 50 प्रतिशत की भारी छूट दी जाएगी। साथ ही, चार्जिंग की समस्या को दूर करने के लिए मॉल, पेट्रोल पंप और होटलों में चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने हेतु विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। ‘मुख्यमंत्री बिहार पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना’ के माध्यम से युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।