कुंदन कुमार/ पटना। ​बिहार की राजनीति और प्रशासनिक कार्यशैली में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रदेश की जनता और सरकारी तंत्र से ईंधन बचाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष अपील की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसाधनों के सीमित उपयोग के आह्वान को आगे बढ़ाते हुए, बिहार सरकार अब ‘सादगी और बचत’ के मॉडल पर काम कर रही है।

​आम जनता और दफ्तरों के लिए नई गाइडलाइंस

​मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि बढ़ते प्रदूषण और ईंधन की खपत को कम करने के लिए अब कड़े और प्रभावी कदम उठाने का समय आ गया है। उन्होंने आम जनता से आग्रह किया है कि वे निजी वाहनों के बजाय मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक से अधिक उपयोग करें। इसके साथ ही, सरकारी और निजी कार्यालयों में ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) को प्रोत्साहित करने की बात कही गई है ताकि सड़कों पर गाड़ियों का दबाव कम हो सके।

​सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’

​पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी सुझाव देते हुए सीएम ने सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाने की अपील की है। इसका उद्देश्य लोगों को पेट्रोल-डीजल की निर्भरता कम करने के लिए जागरूक करना है। साथ ही, अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचने की भी सलाह दी गई है ताकि सरकारी खजाने और संसाधनों की बचत हो सके।

​मंत्रियों के काफिले में कटौती: एक गाड़ी में तीन मंत्री

​इस मुहिम की शुरुआत खुद सरकार के भीतर से हुई है। पटना सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान एक अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। जो मंत्री पहले आधा दर्जन गाड़ियों के लश्कर के साथ चलते थे, वे अब सादगी अपना रहे हैं। कैबिनेट बैठक में मंत्री अशोक चौधरी, जमा खान और मदन सहनी एक ही गाड़ी में सवार होकर पहुंचे। मंत्रियों द्वारा एस्कॉर्ट और सुरक्षा गाड़ियों की संख्या में की गई यह कटौती न केवल ईंधन बचाएगी, बल्कि जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश भी देगी।

​मुख्यमंत्री ने पेश की मिसाल: इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद इस मुहिम का नेतृत्व कर रहे हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री स्वर्गीय सुशील कुमार मोदी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने राजेंद्र नगर स्थित स्मृति पार्क पहुंचे सीएम ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) का उपयोग किया। उन्होंने सुशील मोदी को याद करते हुए कहा कि उनकी राजनीति हमेशा ईमानदारी और विकास पर आधारित थी, और आज की यह पहल उसी सादगीपूर्ण राजनीति का विस्तार है।
​बिहार सरकार की यह पहल दर्शाती है कि यदि नेतृत्व खुद उदाहरण पेश करे, तो व्यवस्था में बदलाव लाना संभव है। अब देखना यह है कि बिहार की जनता इस अपील को कितने व्यापक स्तर पर अपनाती है।