अतीश दीपंकर/कहलगांव: बिहार के भागलपुर जिला अंतर्गत कहलगांव शहर में स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पर खिलवाड़ कर रहे गंगा सेवा सदन पर प्रशासन का चाबुक चला है। मंगलवार की शाम से लेकर देर रात तक चली इस मैराथन छापेमारी के बाद क्लीनिक को पूरी तरह सील कर दिया गया है। टीम के पहुंचते ही संचालक और कथित डॉक्टर मनोज कुमार मौके से फरार होने में सफल रहा, जबकि पुलिस ने उसकी पत्नी रीना कुमारी को गिरफ्तार कर लिया है।
एसडीओ के नेतृत्व में हुई बड़ी कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई कहलगांव एसडीओ कृष्ण चंद्र गुप्ता के नेतृत्व में अंजाम दी गई। छापेमारी टीम में कार्यपालक दंडाधिकारी रवि कुमार, अनुमंडल अस्पताल प्रभारी डॉ. पवन कुमार गुप्ता और अस्पताल प्रबंधक गोविंद कुमार सहित भारी संख्या में पुलिस बल शामिल था। छापेमारी के दौरान वहां मौजूद कर्मचारियों से गहन पूछताछ की गई और मौके से संचालक मनोज कुमार की फर्जी डिग्रियां बरामद की गईं, जो उसके डॉक्टर होने के दावों की पोल खोलती हैं।
मरीजों की जान से खिलवाड़ और फर्जीवाड़ा
दंडाधिकारी रवि कुमार ने बताया कि गंगा सेवा सदन का संचालन मानकों के विपरीत किया जा रहा था। जांच के दौरान वहां एक भी योग्य डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। कथित तौर पर यह क्लीनिक बड़े डॉक्टरों के नाम का बोर्ड लगाकर मरीजों को गुमराह करता था, जबकि हकीकत में इलाज झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा किया जा रहा था। छापेमारी के समय वहां चार मरीज भर्ती थे, जिनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें तत्काल कहलगांव अनुमंडल अस्पताल में शिफ्ट कराया गया है।
ड्रग्स विभाग की जांच और एफआईआर दर्ज
प्रशासनिक टीम के साथ ड्रग्स विभाग की टीम भी मौजूद थी, जिसने क्लीनिक से भारी मात्रा में संदिग्ध दवाएं जब्त की हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए संचालक मनोज कुमार और उसकी पत्नी रीना कुमारी के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की जान जोखिम में डालने वाले ऐसे संस्थानों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
शिकायतों के घेरे में रहा है संस्थान
स्थानीय लोगों के अनुसार, गंगा सेवा सदन के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। इससे पहले भी यहां अनियमितताएं पाई गई थीं। आए दिन यहां इलाज में लापरवाही के कारण परिजनों द्वारा हंगामा किया जाना आम बात थी। चर्चा है कि पूर्व में यहां इलाज के दौरान कई मरीजों की मौत भी हुई है, लेकिन सेटिंग-गेटिंग के जरिए मामला रफा-दफा कर दिया जाता था। इस बार प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से शहर के अन्य फर्जी नर्सिंग होम संचालकों में हड़कंप मच गया है।
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