Bengal TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज ‘खेला होबे’ का दिन है। जी हां.. पूर्व सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पार्टी टीएमसी आज दो खेमों में टूट सकती है। बंगाल की सत्ता से महरूम होने के बाद ममता बनर्जी अब पार्टी से भी हाथ धो सकती है। टीएमसी के बागी विधायक रितब्रता बनर्जी (Ritabrata Banerjee) और संदीपन साहा (Sandipan Saha) ने टीएमसी के करीब 50 विधायकों के समर्थन का दावा किया है। साथ ही बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने का दावा ठोका है। टीएमसी के बागी विधायक (TMC rebel MLA) रितब्रता बनर्जी और संदीपन साहा विधानसभा पहुंच गए। ये सभी बागी विधायक स्पीकर रथिन घोष को नेता प्रतिपक्ष के चुनाव के संबंध में पत्र सौंपेंगे और यह दावा करेंगे कि वे ही असली TMC है।
बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथींद्र बोस भी सदन पहुंच गए हैं। टीएमसी के बागी विधायक मुलाकात करेंगे। सूत्र के मुताबिक बागी गुट ने ऋतब्रत बनर्जी को TMC के नए नेता प्रतिपक्ष (LoP) के तौर पर पेश किया है। यही नहीं टीएमसी के करीब 20 विधायक विधानसभा पहुंच गए हैं। वहीं 50 विधायकों के समर्थन का दावा किया है। अगर ऐसा होता है तो ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव हारने से भी बड़ा झटका होगा।
विधानसभा पहुंचने वाले प्रमुख बागी विधायकों में ऋतब्रत बंद्योपाध्याय, संदीपान साहा, सबीना यास्मीन, अखरुज्जमां और कई अन्य विधायक शामिल हैं। संदीपन साहा ने दावा करते हुए कहा कि उनके पास दो तिहाई विधायकों से ज्यादा समर्थन हासिल है। वहीं बंगाल विधानसभा पहुंचे टीएमसी के बागी विधायकों में शामिल मुस्तफिजुर रहमान ने कहा कि टीएमसी के 59 विधायकों ने हस्ताक्षर किया है। हम सभी ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं है, लेकिन हम चाहते हैं कि किसी वरिष्ठ नेता को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाए।
अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली से बागी विधायक नाराज
बता दें कि ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने सोमवार रात कोलकाता स्थित विधायक हॉस्टल में टीएमसी के कई विधायकों से मुलाकात की थी। इससे पहले ममता बनर्जी की बैठक में टीएमसी के 80 विधायकों में से 60 विधायक नहीं पहुंचे थे। ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को लेकर विरोध के सुर टीएमसी में तेज होते जा रहे हैं। टीएमसी के कई नेता और विधायक पार्टी की इस हालत के लिए खुले तौर पर अभिषेक बनर्जी को ही दोषी ठहरा रहे हैं। वे उन पर भ्रष्टाचार, घमंड, परिवारवाद, सीनियर नेताओं को किनारे करने और I-PAC के प्रोफेशनल्स के ज़रिए पार्टी को अपनी जागीर की तरह चलाने का आरोप लगाया है।
टीएमसी के निष्कासित नेता रिजू दत्ता ने बड़ा दावा
इधर टीएमसी की टूट को लेकर टीएमसी के निष्कासित नेता रिजू दत्ता ने भी टीएमसी पर दावे को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि टीएमसी के 50 विधायकों ने बैठक की है और ये विधायक चुनाव चिह्न पर कब्जा करना चाहते हैं। रिजू दत्ता ने कहा कि टीएमसी के दो विधायकों रितब्रता बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर दावा किया कि उनके हस्ताक्षर जाली हैं।उन्होंने दावा किया कि मैंने कई सालों तक तृणमूल कांग्रेस में काम किया है, इसलिए मुझे खबर मिली और कुणाल घोष ने भी प्रेस में बताया कि रितब्रता बनर्जी के नेतृत्व में करीब 50 टीएमसी विधायक एक होटल में मिले। उन्होंने फोन पर भी बात की और शाम को विधायक छात्रावास में कई विधायकों के साथ बैठक की। एकजुट होकर विधानसभा अध्यक्ष से मिलेंगे और तीन मुख्य मुद्दे उठाएंगे। रिजू दत्ता ने कहा कि हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है। करीब 50 विधायक हमारे साथ हैं। हम असली तृणमूल कांग्रेस हैं। हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है, इसलिए यह चिन्ह हमारा होना चाहिए।

कब पड़ी टीएमसी में टूट की नींव
दरअसल टीएमसी में टूट की नींव सिग्नेचर फर्जीवाड़े (signature forgery) के बाद पड़ी। बंगाल विधानसभा नेता प्रतिपक्ष को लेकर विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए हस्ताक्षर सूची सौंपी गई थी। इसमें कई विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर थे। इस सिग्नेचर फर्जीवाड़े (signature forgery) ने टीएमसी को दो धड़ों में बांट दिया। सिग्नेचर फर्जीवाड़ा विवाद को लेकर पार्टी के 2 विधायक रितब्रता बनर्जी और संदीपान साहा ने आवाज उठाई। सिग्नेचर फर्जीवाड़े का आवाज उठाने वाले दोनों नेताओं को टीएमसी ने निकाल दिया था। यही दोनों विधायक टीएमसी की नाव में कील ठोकने का काम किया।
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