कुंदन कुमार, पटना। बिहार में मध निषेध, उत्पाद और निबंधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का रिपोर्ट कार्ड पेश किया है। इस दौरान सरकार ने राजस्व वसूली से लेकर डिजिटाइजेशन और शराबबंदी तक बड़े-बड़े दावे किए हैं। उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि, वित्तीय वर्ष 2025-26 में निबंधन विभाग ने 8403 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया गया, जो तय लक्ष्य 8250 करोड़ के मुकाबले 101.86 प्रतिशत है।
2026-27 के लिए 10,000 करोड़ का लक्ष्य
डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि, राजस्व वसूली के मामले में पिछले साल की तुलना में करीब 9.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और अब सरकार ने 2026-27 के लिए 10,000 करोड़ का लक्ष्य तय किया है। सरकार का दावा है कि ये सफलता डिजिटाइजेशन और तकनीकी सुधारों की वजह से संभव हुई है।
2.34 करोड़ दस्तावेज हुए डिजिटल
डिप्टी सीएम ने बताया कि 1995 से 2026 तक के 2.34 करोड़ दस्तावेज डिजिटल किए जा चुके हैं, जबकि पुराने रिकॉर्ड भी तेजी से ऑनलाइन किए जा रहे हैं। निबंधन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अब पेपरलेस सिस्टम, ऑनलाइन भुगतान, और दस्तावेजों की रियल टाइम ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं। वहीं आम लोगों के लिए हेल्प डेस्क, वातानुकूलित प्रतीक्षालय और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएं भी दी जा रही हैं।
11 लाख से अधिक केस दर्ज
वहीं, शराबबंदी को लेकर भी सरकार ने सख्ती का दावा किया है। डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि, राज्यभर में 84 चेकपोस्ट बनाए गए हैं। ड्रोन, स्निफर डॉग और स्कैनर की मदद से निगरानी की जा रही है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2016 से मार्च 2026 तक 11 लाख से ज्यादा केस दर्ज हुए हैं और 4 करोड़ 83 लाख लीटर से ज्यादा शराब जब्त की गई है।
राजस्व, तकनीक और सख्ती मोर्चे पर सुधार का दावा
इसके साथ ही सरकार नीरा संवर्धन योजना के जरिए ताड़ी के विकल्प के तौर पर नीरा उत्पादन को बढ़ावा दे रही है, ताकि रोजगार भी बढ़े और शराबबंदी को मजबूती मिले। कुल मिलाकर सरकार का दावा है कि राजस्व, तकनीक और सख्ती तीनों मोर्चों पर बड़ा सुधार हुआ है। लेकिन सवाल यही है कि क्या ये दावे जमीन पर भी उतने ही मजबूत हैं?
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