Bihar Flood: बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ की समस्या को लेकर अब केंद्र सरकार ने भी गंभीरता दिखानी शुरू कर दी है। बाढ़ की स्थिति का स्थायी समाधान तलाशने और इस साल हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र की एक विशेष टीम बिहार पहुंचेगी। इस टीम का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। सीएम सम्राट चौधरी ने पटना में आयोजित हिन्दी दिवस समारोह-सह-कवि सम्मेलन के दौरान खुद इस बात की जानकारी दी है।
सीएम सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि, बाढ़ की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ब्रिक्स जैसे अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में आयोजन में व्यस्त रहने के बावजूद बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर संवेदनशील रहे। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में केंद्रीय टीम बिहार आएगी और बाढ़ से उत्पन्न स्थिति एवं क्षति का आकलन करेगी। मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।
सीएम सम्राट ने आगे कहा कि, बिहार की नदियां राज्य के जीवन और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार हैं, इसलिए नदियों को जोड़ना भी है और उन्हें बचाना भी है। नदी तंत्र के संरक्षण, जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ कार्य किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि बाढ़ से होने वाली जन-धन की क्षति को कम करने के साथ-साथ इस समस्या का स्थायी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए।
सीएम सम्राट ने कहा कि बिहार में बाढ़ की समस्या का एक बड़ा कारण नेपाल से आने वाला पानी है। नेपाल में भारी बारिश के बाद नदियों में पानी बढ़ता है और इसका सीधा असर बिहार के सीमावर्ती इलाकों पर पड़ता है। खासकर उत्तर बिहार के कई जिलों को हर साल इसका सामना करना पड़ता है।
सीएम ने बताया कि, नेपाल से आने वाला पानी सबसे पहले सुपौल जैसे सीमावर्ती इलाकों को प्रभावित करता है। इसके बाद पानी मधुबनी समेत आसपास के कई जिलों तक पहुंचता है। देखते ही देखते बाढ़ का दायरा बढ़ जाता है और बड़ी आबादी इसकी चपेट में आ जाती है। यही वजह है कि इस बार सरकार केवल तत्काल राहत और बचाव तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि बाढ़ से होने वाले नुकसान और इसके पीछे मौजूद स्थायी कारणों का भी अध्ययन कराने की तैयारी में है।
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