मोतिहारी। ​बिहार सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार करते हुए सरकारी अस्पतालों में विश्वस्तरीय पैथोलॉजी जांच सेवाओं की शुरुआत की है। अब जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) तक के मरीजों को कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों सहित 411 प्रकार की जांचों के लिए निजी लैब के महंगे चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को पीपीपी (PPP) मॉडल पर निजी एजेंसियों को सौंपने का निर्णय लिया है।

​’हब एंड स्पोक’ मॉडल: आधुनिक और तेज

​इस नई व्यवस्था को अगले 90 दिनों के भीतर पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा। इसके लिए ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल अपनाया गया है। राज्य के 36 जिला अस्पतालों, तीन अनुमंडलीय अस्पतालों और एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में अत्याधुनिक ‘हब लैब’ स्थापित की जाएंगी। वहीं, 652 अन्य चिकित्सा केंद्रों (PHC, UPHC, रेफरल अस्पताल) को ‘स्पोक सेंटर’ के रूप में विकसित किया जाएगा। स्पोक सेंटर्स से मरीजों के सैंपल एकत्रित कर जिला स्तर की मुख्य ‘हब लैब’ भेजे जाएंगे, जहां आधुनिक मशीनों से उनकी जांच होगी।

​डिजिटल रिपोर्ट और 24/7 सेवा

​मरीजों की सुविधा के लिए यह सेवा सप्ताह के सातों दिन और 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। तकनीक का लाभ देते हुए जांच रिपोर्ट सीधे मरीज के मोबाइल पर भेजी जाएगी, जिसे वे अपने लॉगिन से डाउनलोड कर सकेंगे। राज्य स्वास्थ्य समिति ने मध्य प्रदेश की दो प्रतिष्ठित फर्मों साइंस हाउस मेडिकल्स और सोडानी हॉस्पिटल्स के साथ पांच वर्षों का करार किया है। ये कंपनियां न केवल मशीनें और प्रशिक्षित तकनीशियन उपलब्ध कराएंगी, बल्कि गुणवत्ता नियंत्रण का भी प्रबंधन करेंगी।

​किफायती दर और कड़ी निगरानी

​स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, चयनित एजेंसियां सीजीएचएस (CGHS) पटना की दरों से लगभग 77.06 प्रतिशत कम लागत पर ये सेवाएं प्रदान करेंगी, जिसका पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। लैब्स में फुली ऑटोमेटेड एनालाइजर और एलआईएमएस (LIMS) सॉफ्टवेयर जैसी तकनीकों का उपयोग होगा। कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने सभी सिविल सर्जनों को लैब हेतु स्थान आवंटित करने का निर्देश दे दिया है। पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभाग के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से इसकी लाइव निगरानी की जाएगी।
​बिहार सरकार का यह कदम न केवल गरीब मरीजों की जेब का बोझ कम करेगा, बल्कि सटीक और समय पर जांच सुनिश्चित कर राज्य में मृत्यु दर को घटाने में भी सहायक सिद्ध होगा।