Bihar News: बिहार सरकार ने कामकाजी महिलाओं के हित में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने संविदा, बेलट्रॉन और आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत महिला कर्मचारियों को हर महीने 2 दिनों की विशेष छुट्टी देने की मंजूरी दे दी है। सरकार के इस फैसले से राज्य की करीब डेढ़ लाख से अधिक महिला कर्मियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार के इस निर्णय के बाद बिहार देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था में काम करने वाली महिलाओं के लिए भी प्रति माह 2 दिन के विशेष अवकाश का प्रावधान लागू किया है। लंबे समय से महिला कर्मचारी नियमित सरकारी महिला कर्मियों की तरह इस सुविधा की मांग कर रही थीं।
हर महीने मिलेगी 2 दिन की स्पेशल लीव
नई नीति के तहत अब संविदा, बेलट्रॉन और आउटसोर्सिंग के जरिए विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत महिला कर्मचारियों को प्रत्येक महीने 2 दिन का विशेष अवकाश मिलेगा। यह अवकाश सामान्य रूप से “पीरियड लीव” के नाम से जाना जाता है।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से महिलाओं को कार्यस्थल पर बेहतर माहौल मिलेगा और उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को भी सम्मान मिलेगा। साथ ही इससे महिला कर्मचारियों की कार्यक्षमता और मानसिक संतुलन पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
1992 में बिहार में हुई थी शुरुआत
बिहार में पीरियड लीव की शुरुआत कोई नई बात नहीं है। वर्ष 1992 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में नियमित महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए हर महीने 2 दिन के विशेष अवकाश की व्यवस्था लागू की गई थी। उस समय बिहार देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल था, जहां महिलाओं के लिए इस तरह की सुविधा दी गई थी।
हालांकि यह सुविधा अब तक केवल नियमित सरकारी महिला कर्मचारियों तक सीमित थी। संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा था। अब सरकार ने इस दायरे को बढ़ाते हुए बड़ी संख्या में कार्यरत महिला कर्मियों को भी इसमें शामिल कर लिया है।
कर्नाटक से भी आगे निकला बिहार
हाल ही में कर्नाटक सरकार ने भी सरकारी और निजी क्षेत्र की महिला कर्मचारियों के लिए पीरियड लीव की घोषणा की थी। लेकिन वहां केवल एक दिन के अवकाश का प्रावधान किया गया है। वहीं बिहार ने संविदा और आउटसोर्सिंग महिला कर्मियों को भी हर महीने 2 दिन की विशेष छुट्टी देकर देश में नई मिसाल पेश की है।
सरकार के इस फैसले को महिला सशक्तिकरण और कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। महिला कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है।
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