कुंदन कुमार/पटना। बिहार में पेयजल की उपलब्धता और गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के उन सुदूर और वंचित इलाकों के लिए अच्छी खबर है जो अब तक शुद्ध पेयजल की पाइपलाइन सुविधा से दूर थे। भारत सरकार के जल जीवन मिशन-2 के तहत एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो बिहार में जल क्रांति की अगली कड़ी साबित होगा।

​दिल्ली में मंथन, पटना में ऐलान

​बीते 10 जून को दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और बिहार सरकार के बीच जल जीवन मिशन-2 को लेकर एक अहम MoU साइन हुआ। बिहार सरकार की ओर से इस बैठक का प्रतिनिधित्व लोजपा (रामविलास) के वरिष्ठ नेता और मंत्री संजय सिंह ने किया।
​गुरूवार को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री संजय सिंह ने इस समझौते की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस मिशन का मुख्य उद्देश्य बिहार के उन अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना है जहां अभी तक पाइपलाइन नहीं पहुंच सकी है।

​आर्सेनिक और फ्लोराइड से मुक्ति पर जोर

​मंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल पाइप बिछाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि शुद्ध पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता है। विशेष रूप से राज्य के उन क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है जहां भू-गर्भ जल में आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन की अत्यधिक मात्रा है। ऐसे प्रभावित इलाकों में ‘सतही जल आधारित’ योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि लोगों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल मिल सके।
​राज्य के जिन क्षेत्रों में आर्सेनिक और फ्लोराइड का जहर घुला है वहां हम सतही जल के माध्यम से घर-घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह योजना न केवल प्यास बुझाएगी, बल्कि जल-जनित बीमारियों से भी राज्य को मुक्ति दिलाएगी।

​18,894 करोड़ की बड़ी वित्तीय मांग

​इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए मंत्री संजय सिंह ने केंद्र सरकार के समक्ष 18,894 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की मांग रखी है। बिहार सरकार का मानना है कि राज्य में पहले से चल रही 1 लाख से अधिक पाइप जलापूर्ति योजनाओं को जल जीवन मिशन-2 के साथ जोड़कर और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने भी इस संबंध में सकारात्मक रुख अपनाते हुए बिहार को हर संभव तकनीकी और वित्तीय सहयोग का आश्वासन दिया है। यह पहल बिहार के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जलापूर्ति की तस्वीर बदलने में मील का पत्थर साबित होगी।