पटना। बिहार में एलपीजी उपभोक्ताओं की लापरवाही अब उन पर भारी पड़ती नजर आ रही है। गैस कनेक्शन ब्लॉक होने के एक महीने का लंबा समय बीत जाने के बाद भी राज्य के करीब 30 लाख परिवारों ने अपने कनेक्शन को दोबारा चालू कराने की कोई पहल नहीं की है। स्थिति को देखते हुए अब गैस कंपनियों ने इन निष्क्रिय कनेक्शनों को पूरी तरह से रद्द करने की सख्त तैयारी शुरू कर दी है।

​34 लाख में से सिर्फ 4 लाख ने कराई केवाईसी

​गौरतलब है कि निर्धारित समय सीमा यानी 30 सितंबर तक केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाले राज्य के करीब 34 लाख परिवारों के एलपीजी कनेक्शन ब्लॉक कर दिए गए थे। कंपनियों को उम्मीद थी कि इसके बाद उपभोक्ता तुरंत केवाईसी करवा लेंगे, लेकिन आंकड़े बेहद निराशाजनक रहे। ब्लॉक होने के बाद महज 4 लाख परिवार ही केवाईसी कराने के लिए आगे आए, जबकि बाकी बचे 30 लाख परिवारों की ओर से अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।

​डुप्लीकेट कनेक्शन और आधार कार्ड की पेंच

​गैस कंपनियों द्वारा की जा रही गहन जांच में कई चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। जांच से पता चला है कि कई उपभोक्ताओं ने एक ही आधार नंबर पर बिहार के अलावा अन्य राज्यों में भी एलपीजी कनेक्शन ले रखे हैं। डुप्लीकेट और अवैध कनेक्शनों की इस गड़बड़ी के कारण ही सिस्टम में इन कनेक्शनों की केवाईसी नहीं हो पा रही है।

​नए विकल्पों की तलाश में उपभोक्ता

​केवाईसी प्रक्रिया में आ रही तकनीकी अड़चनों और प्रशासनिक सख्ती के बाद अब ऐसे उपभोक्ता बचने के नए रास्ते तलाश रहे हैं। कई लोग अपने इस अवैध या फंसे हुए कनेक्शन को परिवार के किसी अन्य सदस्य या किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर कराने की जुगत में हैं। वहीं, दूसरी ओर कुछ उपभोक्ता कागजी कार्रवाई और पेचीदगियों से बचने के लिए अपने गैस कनेक्शन को स्वेच्छा से सरेंडर करने की तैयारी भी कर रहे हैं।