बिहार में एक बार फिर मानसून की सक्रियता देखने को मिल रही है। मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश के 27 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में झमाझम बारिश के साथ-साथ आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने की भी पूरी आशंका जताई गई है। इसके अलावा, 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के आसार हैं, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
नदियों का बढ़ा जलस्तर और बाढ़ का खतरा
पिछले 24 घंटों के दौरान पटना और खगड़िया समेत कुछ हिस्सों में बारिश दर्ज की गई है। लगातार हो रही बारिश और ऊपरी इलाकों के प्रभाव से गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने के कारण बेगूसराय जिले के बलिया प्रखंड के अंतर्गत आने वाले भवानंदपुर, परमानंदपुर और भगतपुर जैसे इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
रक्षाबंधन पर कैसा रहेगा मौसम?
आगामी 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पावन पर्व है। इस दिन भी राज्य में मौसम पूरी तरह साफ रहने की उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार, त्योहार के दिन भी कई जिलों में आसमान में बादल छाए रह सकते हैं और कुछ चुनिंदा स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। राजधानी पटना की बात करें तो यहां आज बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश की संभावना है। बारिश होने से तापमान में गिरावट आएगी और उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिलेगी।
मानसूनी बारिश में 42 प्रतिशत की भारी कमी
इस बार बिहार में मानसून का असर अपेक्षाकृत कमजोर रहा है, जिससे सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है।
- निर्धारित बारिश: 26 अगस्त तक राज्य में 741.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी।
- वास्तविक बारिश: इसके मुकाबले अब तक केवल 428.6 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की गई है।
- कमी: आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक सामान्य से लगभग 42% कम बारिश हुई है, जिसका सीधा और प्रतिकूल प्रभाव कृषि तथा फसलों की सिंचाई पर पड़ रहा है।
मौसम विशेषज्ञों की चेतावनी और सुरक्षा सलाह
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही पूरे राज्य में एक साथ भारी बारिश नहीं हो रही है, लेकिन बारिश का पैटर्न पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अगले 2 से 3 दिनों तक मौसम का मिजाज बदला रहेगा। नमी और स्थानीय बादलों के निर्माण के कारण कई जिलों में छिटपुट या हल्की बारिश हो सकती है।
किसानों और आम नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय मौसम अपडेट पर लगातार नजर बनाए रखें। गरज-चमक और वज्रपात के दौरान खुले मैदानों में जाने से बचें। सुरक्षा की दृष्टि से बिजली के खंभों और बड़े पेड़ों के नीचे बिल्कुल शरण न लें, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।


