पटना। बिहार में शहरीकरण की प्रक्रिया को तेज करने और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने नए नगर निकायों के गठन और मौजूदा निकायों के पुनर्गठन की कवायद शुरू कर दी है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर सीमा विस्तार और नए निकायों के गठन से जुड़े प्रस्ताव मांगे हैं। इसके लिए 15 सितंबर 2026 तक की समय-सीमा तय की गई है।

​जिला स्तर पर होगी समीक्षा और बैठकें

​सरकार के निर्देश के अनुसार, सभी जिलाधिकारी अपने जिले के प्रभारी मंत्री से अनुरोध कर ‘जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति’ की बैठक आयोजित कराएंगे। इन बैठकों में नगर निकायों के विलय, सीमा विस्तार, दर्जा बढ़ाने और नए निकायों के गठन से जुड़े प्रस्तावों पर गहन चर्चा की जाएगी। जिला स्तर पर समीक्षा के बाद ही इन प्रस्तावों को अंतिम रूप देकर विभाग के पास भेजा जाएगा।

​पुनर्गठन के प्रमुख विकल्प और दायरे

​राज्य में शहरी क्षेत्रों के विस्तार के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण विकल्प तैयार किए हैं:

  • ​निकायों का विलय: दो या दो से अधिक नजदीकी नगर निकायों को मिलाकर एक बड़ा और मजबूत निकाय बनाया जा सकता है।
  • ​ग्रामीण क्षेत्रों का जुड़ाव: तेजी से शहरी रूप ले रहे ग्रामीण इलाकों को नजदीकी नगर निकायों की सीमा में शामिल किया जाएगा।
  • ​दर्जे में बढ़ोतरी: छोटे नगर निकायों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए उनका दर्जा बढ़ाया जा सकता है या उन्हें बड़े निकायों में समाहित किया जा सकता है।

​तेजी से बदलते गांवों पर रहेगी खास नजर

​इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य केंद्र वैसे ग्रामीण इलाके हैं जहां आबादी और आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर या तो उन्हें पास के शहरों से जोड़ा जाएगा अथवा उनके लिए एक नए स्वतंत्र नगर निकाय का गठन किया जाएगा। इसका उद्देश्य उभरते शहरी क्षेत्रों को बेहतर नागरिक सुविधाएं और प्रशासनिक सुगमता प्रदान करना है।