पटना। बिहार पुलिस ने राज्य में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले अपराधियों और ड्रग माफियाओं के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने सूबे के 12 बड़े कुख्यातों की चल-अचल संपत्ति को कुर्क (जब्त) करने का एक मजबूत प्रस्ताव प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भेजा है। बिहार के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब अपराधियों के सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने के लिए ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (PMLA) का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य अपराध के दम पर खड़े किए गए आर्थिक साम्राज्य की कमर तोड़ना है।
अंडरवर्ल्ड में हड़कंप: लिस्ट में शामिल हैं कई बड़े नाम
बिहार पुलिस द्वारा तैयार की गई इस ब्लैक लिस्ट में देश का सबसे बड़ा स्वर्ण तस्कर और लुटेरा सुबोध कुमार, नौबतपुर का कुख्यात मनोज सिंह और धनरुआ के चर्चित ‘पांडव गिरोह’ का सरगना संजय कुमार सिंह शामिल हैं। इसके अलावा खगौल सिंडिकेट का संचालन करने वाले राजद के पूर्व विधायक रीतलाल यादव के भाई टिंकू कुमार, मोतिहारी के देव गुप्ता और राहुल सिंह जैसे रसूखदार नाम भी इस रडार पर हैं। इन सभी 12 अपराधियों पर हत्या, डकैती, आर्म्स एक्ट, रंगदारी और जमीन कब्जाने जैसे गंभीर संगीन मामलों के कुल 135 मुकदमे दर्ज हैं।
संजय सिंह: पांडव गिरोह के सरगना का रियल एस्टेट नेटवर्क
धनरुआ का रहने वाला संजय सिंह कुख्यात ‘पांडव गिरोह’ को ऑपरेट करता है। हत्या और भू-माफियागिरी से जुड़े 19 मामलों के आरोपी संजय ने करीब 25 से 30 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति अर्जित की है। उसने अपराध की काली कमाई का बड़ा हिस्सा पटना बाईपास से लेकर रांची तक रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश किया है। रिश्तेदारों के नाम पर आलीशान प्लॉट और आधुनिक हथियार खरीदना इसका मुख्य जरिया रहा है।
टिंकू कुमार: पूर्व विधायक के भाई का खगौल सिंडिकेट
दानापुर और खगौल इलाके में रंगदारी के लिए कुख्यात टिंकू कुमार, पूर्व विधायक रीतलाल यादव का भाई है। फिलहाल भागलपुर जेल की सलाखों के पीछे बंद टिंकू और उसके भाई ने मिलकर लगभग 70 करोड़ रुपए से अधिक की बेनामी संपत्ति खड़ी की है। इन्होंने तीन एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर दुकानें खड़ी कर ली थीं। पुलिस छापेमारी में इनके ठिकानों से 11.30 लाख रुपए कैश और नोट गिनने की मशीन बरामद हो चुकी है।
मनोज और माणिक: नौबतपुर का खतरनाक ‘बाप-बेटा गिरोह’
जमीन विवादों और हत्याओं की दुनिया में मनोज सिंह और उसके बेटे माणिक का खौफनाक नाम है। इन दोनों पर कुल 53 आपराधिक मामले दर्ज हैं। विवादित जमीनों पर जबरन कब्जा दिलवाने के एवज में इस गिरोह ने जानीपुर और फुलवारीशरीफ जैसे इलाकों में करोड़ों की डीलिंग की। वर्तमान में बाप-बेटे के पास 50 करोड़ रुपए से अधिक की चल-अचल बेनामी संपत्ति मौजूद है।
सुबोध कुमार: 500 किलो सोना लूटने वाला मास्टरमाइंड
नालंदा का रहने वाला सुबोध कुमार देश का सबसे बड़ा सोना लुटेरा माना जाता है। फिलहाल पटना की बेऊर जेल में बंद सुबोध वहीं से मोबाइल के जरिए अपना पूरा नेटवर्क चलाता है। अकेले सुबोध पर कुल 37 संगीन मामले दर्ज हैं। उसने पिछले 10 सालों में देश के 10 अलग-अलग राज्यों से लगभग 500 किलो सोना लूटा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, सुबोध के पास करीब 70 करोड़ रुपए का बेनामी साम्राज्य है।
अब ईडी इन सभी अपराधियों के बैंक खातों, आलीशान मकानों, महंगी गाड़ियों और कीमती जमीनों को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत पूरी तरह सीज करने की तैयारी में है।

