कुंदन कुमार, पटना। बिहार में सरकार द्वारा निबंधन कार्यालयों (रजिस्ट्री ऑफिस) को पूरी तरह से पेपरलेस बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस निर्णय के विरोध में अब जमीन के दस्तावेज लिखने वाले कातिब (दस्तावेज नवीस) आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। सरकार के इस कदम के खिलाफ पूरे प्रदेश के कातिबों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

​पटना में हुई अहम बैठक, लिया गया बड़ा फैसला

​इस पूरे मामले को लेकर पटना के पंचायत परिषद भवन में ‘बिहार राज्य दस्तावेज नवीस संघ’ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में बिहार के सभी जिलों से बड़ी संख्या में आए दस्तावेज नवीसों ने हिस्सा लिया।
​बैठक में लंबी चर्चा के बाद यह कड़ा निर्णय लिया गया कि यदि सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो कल से पूरे बिहार में रजिस्ट्री ऑफिस में जमीन की रजिस्ट्री का काम पूरी तरह से ठप कर दिया जाएगा। संघ का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

​हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट

​दस्तावेज नवीसों का मुख्य तर्क है कि सरकार के इस एकतरफा फैसले से राज्यभर में 10 हजार से अधिक कातिब और दस्तावेज लेखक सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।
​बिहार राज्य दस्तावेज नवीस संघ के महामंत्री मुरारी कुमार सिन्हा ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार प्रदेश के युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार देने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीन की रजिस्ट्री को पेपरलेस बनाकर हजारों दस्तावेज लिखने वालों को बेरोजगार करने पर तुली हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह किस प्रकार का न्याय है? सरकार को हमारी वाजिब मांगों को तुरंत सुनना चाहिए।

​कातिबों की प्रमुख मांगें

​बिहार के तमाम दस्तावेज लेखकों और कातिबों की मांगें बिल्कुल स्पष्ट हैं। उनका कहना है कि सरकार यदि व्यवस्था में बदलाव करना चाहती है, तो उसे एक सुव्यवस्थित नियम के तहत लागू किया जाना चाहिए। उनकी मुख्य मांगें हैं:

  • ​तत्काल प्रभाव से बिना किसी पूर्व तैयारी के चल रही पेपरलेस रजिस्ट्री प्रक्रिया को रोका जाए।
  • ​जमीन की लिखावट और दस्तावेजों के कार्य से जुड़े सभी कातिबों को डिजिटल सिग्नेचर और अन्य जरूरी तकनीकी उपकरण सरकार द्वारा मुफ्त या सुलभ कराए जाएं।
  • ​जब तक सभी दस्तावेज नवीसों को तकनीकी रूप से सक्षम और प्रशिक्षित नहीं किया जाता, तब तक इस नई प्रणाली को अनिवार्य न बनाया जाए।

​संघ ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्दबाजी दिखाते हुए उनकी इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो कल से पूरे बिहार में जमीन की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री का कार्य पूरी तरह से बंद हो जाएगा, जिससे आम जनता को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।