पटना। बिहार एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के एक बड़े और महत्वपूर्ण आयोजन का गवाह बनने जा रहा है। राज्य में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के लिए में तीन दिवसीय शक्ति संवाद का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस प्रतिष्ठित आयोजन के लिए बिहार का ऐतिहासिक शहर राजगीर चुना गया है, जहां 27, 28 और 29 नवंबर को देश भर की महिला अधिकारिता से जुड़ी दिग्गज हस्तियां जुटेंगी।
महिलाओं की बढ़ती सशक्तिकरण को प्रदर्शित करेगा बिहार
बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष प्रो. अप्सरा ने इस राष्ट्रीय आयोजन को बिहार में लाने के पीछे की प्रेरणा साझा करते हुए बताया कि उन्होंने पदभार संभालने के बाद अन्य राज्यों में आयोजित ऐसे सम्मेलनों में हिस्सा लिया था। जब इस बार ‘शक्ति संवाद’ के आयोजन की रूपरेखा तैयार हो रही थी, तो उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष से विशेष अनुरोध किया था कि इस बार का आयोजन बिहार में किया जाए।
इसके पीछे उनका मुख्य उद्देश्य देश के सामने यह तस्वीर पेश करना है कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार में कितना सकारात्मक बदलाव आया है। आज बिहार की महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में काफी आगे बढ़कर सशक्त हुई हैं।
देश भर से जुटेंगी 150 से अधिक महिला प्रतिनिधि
यह तीन दिवसीय कार्यक्रम अपने आप में बेहद खास होने वाला है, जिसमें देश भर से करीब 150 से अधिक प्रतिष्ठित प्रतिनिधि हिस्सा लेंगी। इस महाकुंभ में देश के सभी राज्यों के महिला आयोगों की अध्यक्ष, सचिव और सदस्य सचिव विशेष रूप से शामिल होंगी।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा किया जाएगा, जबकि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर इसमें विशिष्ट अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएंगी।
महिलाओं से जुड़े मुद्दों और समस्याओं के समाधान पर होगा मंथन
शक्ति संवाद राष्ट्रीय महिला आयोग की एक प्रमुख परामर्श और क्षमता-निर्माण पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर और विभिन्न राज्यों के महिला आयोगों के बीच आपसी तालमेल, संवाद और कार्यकुशलता को अधिक मजबूत करना है।
इस तीन दिवसीय मंथन के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा:
- देश भर की महिलाओं से जुड़े ज्वलंत मुद्दों और उनकी वर्तमान समस्याओं की समीक्षा।
- महिलाओं के सामने आ रही चुनौतियों का प्रभावी और स्थायी समाधान खोजना।
- महिला कल्याण से जुड़ी संस्थाओं को जमीनी स्तर पर और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए ठोस रणनीतियां तैयार करना।
यह आयोजन न केवल बिहार की महिलाओं के बढ़ते कदमों को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाएगा, बल्कि महिला अधिकारों की सुरक्षा और उनके सर्वांगीण विकास की दिशा में एक मिल का पत्थर साबित होगा।

