पटना। बिहार की महिलाओं के लिए यह रक्षाबंधन सिर्फ एक पारंपरिक त्योहार नहीं, बल्कि उनके आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखने जा रहा है। राज्य सरकार ने महिलाओं को रक्षाबंधन के अवसर पर एक अनूठा उपहार देते हुए “समृद्ध महिला – समृद्ध बिहार अभियान” की शुरुआत की है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है, क्योंकि एक समृद्ध महिला ही सशक्त और मजबूत बिहार की नींव रख सकती है।
रोजगार के नए मोर्चे और लक्ष्य
इस अभियान के तहत सरकार ने अगले कुछ वर्षों में 1 करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का एक बहुत बड़ा और स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है। महिलाओं की रुचि और कौशल के अनुसार उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा:
- पशुपालन क्षेत्र: इस अभियान के माध्यम से लगभग 60 लाख महिलाओं को पशुपालन से जोड़कर उनकी आय के स्रोत को मजबूत किया जाएगा।
- विनिर्माण क्षेत्र: राज्य में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) सेक्टर को बढ़ावा देते हुए 25 लाख महिलाओं को इस क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
- सेवा क्षेत्र: विभिन्न सेवा क्षेत्रों के माध्यम से 15 लाख महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जाएगा ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
मुख्यमंत्री रोजगार योजना और वित्तीय सहायता
इस अभियान के पहले चरण को गति देने के लिए सरकार ने वित्तीय सहायता का भी पूरा इंतजाम किया है। मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत राज्य की 5 लाख बहनों के खातों में सीधे 600 करोड़ रुपये की राशि का अंतरण किया जाएगा। यह राशि महिलाओं को अपना खुद का छोटा व्यवसाय या उद्यम शुरू करने में एक बड़ी आर्थिक मदद साबित होगी।
इसके साथ ही, सरकार ने लंबी अवधि की योजना बनाते हुए अगले 5 वर्षों में लगभग 20,000 करोड़ रुपये के योजनागत संसाधनों के अभिसरण की रूपरेखा तैयार की है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि महिलाओं के विकास से जुड़ी हर योजना का लाभ जमीनी स्तर पर पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे।


