कुंदन कुमार, पटना। बिहार की धरती से शुरू हुई SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की प्रक्रिया अब देश की सियासत और संवैधानिक हलकों में एक बड़ा भूचाल बन चुकी है। पटना में आयोजित एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईस्ट जोन कोऑर्डिनेटर सतीश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के तहत भारी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं, जिससे आयोग की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

​वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर तीखा आक्रोश

​सतीश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि बिहार में SIR के नाम पर जो मनमानी हुई है, उसने लोकतंत्र की नींव को हिला दिया है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के भीतर भी कई आंतरिक फैसलों को लेकर भारी असहमति और मतभेद सामने आए हैं। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह मुद्दा देशव्यापी राजनीतिक संकट का रूप ले सकता है।

​CJP की तीन प्रमुख मांगें और 48 घंटे का अल्टीमेटम

​प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से CJP की ओर से तीन मुख्य मांगें सरकार और आयोग के सामने रखी गई हैं:

  • ​इस्तीफा और निष्पक्ष जांच: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से तुरंत इस्तीफा दें और उनके तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच बिठाई जाए।
  • ​कटे हुए नाम बहाल हों: SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए सभी मतदाताओं के नाम तत्काल प्रभाव से वापस जोड़े जाएं।
  • ​आयोग का पुनर्गठन और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: चुनाव आयोग का नए सिरे से गठन किया जाए और देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान ले।

​CJP ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर ये मांगें नहीं मानी गईं, तो उनकी पार्टी और समर्थक सड़कों पर उतरेंगे। चूंकि इस विवाद की शुरुआत बिहार से हुई है, इसलिए राज्य में एक बहुत बड़ा और व्यापक जन-आंदोलन किया जाएगा।

​संवैधानिक और सियासी भविष्य पर टकटकी

​यह पूरा घटनाक्रम आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति को गरमाने के लिए पूरी तरह तैयार है। एक तरफ जहां विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया में छेड़छाड़ बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग की कार्यशैली कटघरे में खड़ी हो गई है। अब देखना यह होगा कि आयोग या सुप्रीम कोर्ट इस चेतावनी के बाद क्या रुख अपनाते हैं।