कुमार उत्तम, मुजफ्फरपुर। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने आगामी एमएलसी चुनाव को लेकर मुजफ्फरपुर में कोर कमेटी के पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता, भाजपा की कार्यशैली और बिहार में बाढ़ एवं कानून व्यवस्था के मुद्दों को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा।
बंगाल चुनाव पर सवाल
प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आज आयोग की साख पर जो प्रश्नचिह्न लग रहे हैं, उसकी शुरुआत खुद मुख्य चुनाव आयुक्त के दौर से हुई है। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि यदि चुनाव आयोग वास्तव में निष्पक्ष होता, तो भाजपा वहां 77 सीटें जीतने के बजाय 50 सीटों के अंदर सिमट जाती।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को भाजपा की अनियमितताएं कभी नहीं दिखतीं। हजारों करोड़ रुपये के चुनावी खर्च पर आयोग की नजर नहीं पड़ी। इसके अलावा, बांकीपुर चुनाव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां धनबल का खुलेआम प्रयोग किया गया, उनके कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कराया गया और जब हार का अंदेशा हुआ तो शाम 3:00 बजे ही पोलिंग बंद करवा दी गई, जो आयोग की पक्षपाती भूमिका को दर्शाता है।
बिहार की बाढ़ और नेतृत्व की उदासीनता
बिहार में वर्तमान बाढ़ संकट पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि पूरा राज्य बाढ़ से त्रस्त है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को इसकी कोई चिंता नहीं है। उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री से बाढ़ के मुद्दे पर एक बयान तक दिलवाकर देख लीजिए।
उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि यदि गुजरात में बाढ़ आ जाए, तो केंद्र और राज्य सरकार के तमाम तंत्र राहत में जुट जाते हैं, लेकिन बिहार में 50 लाख लोग बाढ़ में फंसे हैं और शीर्ष नेतृत्व मौन है। अमित शाह के पिछले वादों पर तंज कसते हुए उन्होंने जनता से अपील की कि वे जाति और धर्म के नाम पर वोट देना बंद करें, वरना नेताओं के झूठे वादों का शिकार होते रहेंगे।
कानून व्यवस्था और बेटियों की सुरक्षा
बिहार में नाबालिग लड़कियों से छेड़खानी की बढ़ती घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने जनता को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि जब जनता खुद भ्रष्टाचारियों, माफियाओं और अपराधियों को चुनकर जिताएगी, तो ऐसी घटनाएं ही सामने आएंगी। बोये पेड़ बाबुल का, तो आम कहां से होय वाली कहावत को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि जैसी फसल बोएंगे, वैसी ही काटेंगे।
मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जिस राज्य के मुख्यमंत्री ने खुद कहा हो कि आपको कोई हाथ लगा देगा तो हम इस्तीफा दे देंगे, वहां जमुई की हालिया घटना पर एक बयान देना भी उन्होंने उचित नहीं समझा।


