कुंदन कुमार, पटना। बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अपने विशेष अभियान के तहत एक और बड़ी सफलता हासिल की है। गुजरात के सूरत शहर में हुए चर्चित भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) लूटकांड में लंबे समय से वांछित चल रहे मुख्य आरोपी को बिहार के वैशाली जिले से धर दबोचा गया है। इस कार्रवाई से अपराधियों के बीच हड़कंप मच गया है।

​गुप्त सूचना पर वैशाली में दबिश

​बिहार एसटीएफ को मिली पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर वैशाली जिले के बिदुपुर थाना क्षेत्र में एक विशेष छापामारी अभियान चलाया गया। इस दौरान पुलिस ने गुजरात के वराछा थाना कांड संख्या 906/26 में फरार चल रहे वांछित आरोपी पीयूष उर्फ प्रिंस कुमार को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया। एसटीएफ की इस त्वरित और पेशेवर कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे देश के किसी भी कोने में अपराध को अंजाम दें, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुंच ही जाते हैं।

​अवैध हथियार और कारतूस बरामद

​गिरफ्तारी के बाद जब आरोपी पीयूष उर्फ प्रिंस कुमार की तलाशी ली गई, तो एसटीएफ के होश उड़ गए। उसके पास से एक अवैध देसी पिस्टल और चार जिंदा कारतूस बरामद किए गए। इससे इस बात की आशंका और पुख्ता हो जाती है कि आरोपी किसी बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की फिराक में था या फिर अपनी सुरक्षा के नाम पर किसी बड़ी गैंग से जुड़ा हुआ था। हथियार की बरामदगी के बाद उस पर आर्म्स एक्ट के तहत भी अलग से कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।

​क्या है पूरा सूरत एसबीआई लूटकांड?

​यह पूरा मामला इसी साल 27 अप्रैल का है, जब गुजरात के सूरत शहर स्थित भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक शाखा में सनसनीखेज डकैती को अंजाम दिया गया था। इस दुस्साहसिक वारदात में अपराधियों ने बैंक से लगभग 50 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम लूट ली थी। इस घटना के बाद से ही सूरत पुलिस और विभिन्न राज्यों की एजेंसियां आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थीं। इस कांड में पीयूष उर्फ प्रिंस कुमार की संलिप्तता सामने आने के बाद से वह लगातार अपनी पहचान बदलकर छिपता फिर रहा था।

​आगे की कानूनी प्रक्रिया और अगली कार्रवाई

​गिरफ्तारी के बाद बिहार एसटीएफ ने आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्थानीय थाने में कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी को संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा। इसके बाद सूरत पुलिस को ट्रांजिट रिमांड के लिए आधिकारिक सूचना दे दी गई है, ताकि आरोपी को गुजरात ले जाकर वहां की अदालत में पेश किया जा सके और लूटी गई रकम की बरामदगी के साथ-साथ इस गिरोह के अन्य सदस्यों के ठिकानों का भी खुलासा किया जा सके।