दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल पराली जलाने की समस्या पर केंद्र सरकार सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है। पर्यावरण मंत्रालय ने पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। प्रस्तावित नियमों के तहत जिस खेत में पराली जलाई जाएगी, उसे घटना की तारीख से 15 महीने तक ‘रेड कैटेगरी’ में रखा जाएगा।

पराली जलाने वाले खेतों पर क्या होगा असर?

प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, पराली जलाने की पुष्टि होने पर संबंधित खेत की ‘रेड एंट्री’ 15 महीने तक प्रभावी रहेगी। हालांकि, इस कैटेगरी में शामिल किए जाने के बाद किसान या जमीन पर क्या प्रशासनिक या अन्य प्रतिबंध लागू होंगे, इसे लेकर ड्राफ्ट में अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

अगर उसी जमीन पर 15 महीने की अवधि के दौरान दोबारा पराली जलाने की घटना सामने आती है, तो रेड एंट्री अगले 15 महीनों के लिए बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा, यदि पर्यावरण जुर्माना निर्धारित समयसीमा में जमा नहीं किया जाता है, तो भी रेड एंट्री की अवधि आगे बढ़ाने का प्रावधान है।

पराली जलाने पर कितना लगेगा जुर्माना?

प्रस्तावित नियमों में पराली जलाने पर जमीन के क्षेत्रफल के आधार पर पर्यावरण जुर्माने की दरें बरकरार रखी गई हैं:

  • 2 एकड़ से कम जमीन: ₹5,000
  • 2 से 5 एकड़ जमीन: ₹10,000
  • 5 एकड़ से अधिक जमीन: ₹30,000

जुर्माने से मिली राशि का कहां होगा इस्तेमाल?

ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, पर्यावरण जुर्माने से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल फसल विविधीकरण, बायोमास के उपयोग और भंडारण से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को विकसित करने तथा फसल अवशेष प्रबंधन में रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।

सरकार का प्रस्तावित कदम पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को कम करने और इसके पर्यावरणीय प्रभाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से अहम माना जा रहा है।

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