बिहार सरकार ने उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने और छात्रों की राह आसान बनाने के लिए बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को अगले पांच वर्षों (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक) के लिए विस्तारित कर दिया है। इसके साथ ही योजना के नियमों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी किए गए हैं, जिनका सीधा असर उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों पर पड़ेगा।

​दो लाख तक के लोन के लिए नई प्रक्रिया

​संशोधित नियमों के अनुसार, अब 2 लाख रुपए तक के शिक्षा ऋण के लिए विद्यार्थियों को बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम के पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

  • ​आवेदन करने के बाद छात्रों को अपने दस्तावेजों का सत्यापन जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र (DRCC) में कराना अनिवार्य होगा।
  • ​निगम को आवेदन मिलने के बाद उसकी जांच और ऋण स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया के लिए 15 कार्य दिवस की समय-सीमा तय की गई है।
  • ​पहले यह सरल प्रक्रिया 4 लाख रुपए तक के ऋण पर लागू थी, जिसे अब घटाकर 2 लाख रुपए कर दिया गया है।
  • ​यदि किसी विद्यार्थी को 2 लाख रुपए से अधिक का ऋण चाहिए, तो उसे विद्यालक्ष्मी पोर्टल के जरिए आवेदन करना होगा।

​सकल नामांकन अनुपात बढ़ाने का लक्ष्य

​इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में उच्च शिक्षा की पहुंच को और व्यापक बनाना है। इसके तहत सरकार ने उच्च शिक्षा के सकल नामांकन अनुपात (GER) को 28.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। चालू वित्तीय वर्ष के लिए इस योजना के सुचारू संचालन हेतु 950 करोड़ रुपए की राशि खर्च करने की प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है।

​ऋण चुकाने की समयावधि

​विद्यार्थियों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए लोन की राशि के आधार पर पुनर्भुगतान की अवधि को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है:

  • ​2 लाख रुपए तक का ऋण: पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाली मोरेटोरियम (छूट) अवधि के समाप्त होने पर अधिकतम 3 वर्ष के भीतर चुकाना होगा।
  • ​2 से 4 लाख रुपए तक का ऋण: इसके लिए अधिकतम 5 वर्ष की अवधि तय की गई है।
  • ​4 से 10 लाख रुपए तक का ऋण: बड़े शिक्षा ऋणों को चुकाने के लिए विद्यार्थियों को अधिकतम 10 वर्ष का समय मिलेगा।

​यह संशोधित योजना राज्य के युवाओं को आर्थिक तंगी से दूर रख कर उच्च शिक्षा के सपनों को साकार करने में एक मील का पत्थर साबित होगी।