Bihar news: ​बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। अब शिक्षकों के तबादले सिफारिश या पैरवी के आधार पर नहीं बल्कि पूरी तरह से एक डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली के जरिए होंगे। इसके लिए शिक्षा विभाग ने 100 अंकों की एक नई एपीआई (API) आधारित मेरिट व्यवस्था तैयार की है जिससे शिक्षकों को उनकी योग्यता, सेवाकाल और व्यक्तिगत जरूरतों के आधार पर मनचाहा जिला और स्कूल मिल सकेगा।

​गंभीर बीमारियों और दिव्यांगों को मिलेगी विशेष प्राथमिकता

​नई स्थानांतरण नीति में मानवीय दृष्टिकोण को सर्वोपरि रखा गया है। इसके तहत विशेष परिस्थितियों वाले शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी:

  • ​गंभीर बीमारियां: कैंसर, ओपन हार्ट सर्जरी, किडनी प्रत्यारोपण, ब्रेन ट्यूमर और बोन टीबी जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे शिक्षकों को इस व्यवस्था में सीधे 20 अंक दिए जाएंगे।
  • ​दिव्यांग शिक्षक: निर्धारित मानकों के अनुसार दिव्यांग शिक्षकों को 15 अंकों का विशेष लाभ मिलेगा।
  • ​महिला व दंपती शिक्षक: महिला शिक्षकों के साथ-साथ ऐसे शिक्षक पति-पत्नी, जो वर्तमान में सेवा के कारण एक-दूसरे से दूर तैनात हैं, उन्हें 10-10 अंक प्रदान किए जाएंगे।

​सेवा अनुभव और वर्तमान पदस्थापन के आधार पर मिलेंगे अंक

​स्थानांतरण प्रक्रिया में शिक्षकों के लंबे अनुभव का पूरा सम्मान किया गया है:

  • ​सेवा अवधि: 31 मार्च तक की कुल सेवा अवधि के आधार पर प्रत्येक वर्ष के लिए 1 अंक निर्धारित किया गया है।
  • ​वर्तमान पदस्थापन: शिक्षक की मौजूदा तैनाती की भौगोलिक स्थिति और दूरी के आधार पर भी अंक जोड़े जाएंगे।
  • ​टाई-ब्रेकर नियम: यदि मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान किन्हीं दो या दो से अधिक शिक्षकों के अंक आपस में बराबर हो जाते हैं तो ऐसी स्थिति में अधिक उम्र वाले शिक्षक को वरीयता दी जाएगी।

​पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी होगी प्रक्रिया

​शिक्षा विभाग द्वारा लाई गई इस नई व्यवस्था से सिफारिशी दौर और भाई-भतीजावाद पर पूरी तरह लगाम लगेगी।

  • ​ऑनलाइन पोर्टल: आवेदन से लेकर दस्तावेजों के सत्यापन तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से ऑनलाइन होगी। शिक्षकों को इसके लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
  • ​डिजिटल प्रोफाइल: ट्रांसफर और स्कोरिंग से जुड़ी सारी जानकारी शिक्षकों को उनके अपने डिजिटल प्रोफाइल पर उपलब्ध करा दी जाएगी।
  • ​रिक्तियों पर आधारित आवंटन: शिक्षकों को उनके अंकों के घटते क्रम में स्कूल चुनने का पहला विकल्प मिलेगा। अधिक अंक वाले शिक्षकों को उनकी पसंद का जिला पहले आवंटित किया जाएगा, जबकि कम अंक वाले शिक्षकों को बची हुई रिक्तियों के आधार पर समायोजित किया जाएगा।

​शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार इस डिजिटल और डेटा-आधारित मॉडल का मुख्य उद्देश्य पूरी तरह पारदर्शिता सुनिश्चित करना और जरूरतमंद शिक्षकों को उनकी सेवाओं का उचित प्रतिफल देना है। इससे स्कूलों में शिक्षकों का बेहतर संतुलन भी स्थापित होगा।