पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता की रक्षा के लिए शनिवार को शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी जोरदार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर आज दोपहर 12 बजे जेडी वीमेंस कॉलेज से लोकभवन तक एक मार्च निकाला जा रहा है। इस प्रदर्शन के माध्यम से राज्यपाल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा और उच्च शिक्षा की स्वतंत्रता को बनाए रखने की पुरजोर मांग की जाएगी।
विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर मंडराता खतरा
संघर्ष मोर्चा ने आरोप लगाया है कि नए अधिनियम के माध्यम से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को समाप्त करने और उन पर सरकारी नियंत्रण को बढ़ाने की साजिश रची जा रही है। अधिनियम की धारा-3 के तहत राज्य सरकार को राजपत्र में अधिसूचना जारी कर विश्वविद्यालयों की प्रकृति में बदलाव करने, उनके विस्तार या संकुचन और क्षेत्रीय अधिकारिता को पुनर्परिभाषित करने का पूर्ण अधिकार मिल जाता है। इसके साथ ही, संस्थानों के विवरण में संशोधन के प्रावधानों का भी कड़ा विरोध किया जा रहा है।
महिला महाविद्यालयों के विलय का पुरजोर विरोध
मोर्चा ने सीतामढ़ी में माता सीता विश्वविद्यालय और बेगूसराय में दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना के निर्णय पर भी आपत्ति जताई है। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद माता सीता विश्वविद्यालय में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के महिला महाविद्यालयों और दिनकर विश्वविद्यालय में ललित नारायण मिथिला एवं मुंगेर विश्वविद्यालय के कॉलेजों को शामिल करने की योजना है। इसे विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता पर सीधा आघात बताते हुए मांग की गई है कि महिला महाविद्यालयों का अन्य विश्वविद्यालयों में विलय न किया जाए तथा इस नए अधिनियम को पारंपरिक संस्थानों पर लागू न किया जाए।
16 अक्टूबर तक जारी रहेगा चरणबद्ध आंदोलन
इस विरोध प्रदर्शन को प्रभावी बनाने के लिए कर्मचारियों ने 16 अक्टूबर तक चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। इस दौरान सभी शिक्षक और कर्मचारी काला बिल्ला लगाकर अपने कार्यों का संपादन करेंगे। साथ ही, हर दिन दोपहर 2:00 बजे से 2:30 बजे तक अपने संस्थानों के मुख्य द्वार के बाहर सड़क पर मानव शृंखला बनाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे और नारेबाजी करेंगे, जिसके उपरांत वे अपने कार्य पर लौट जाएंगे।

