बाढ़। ​बिहार के पुलिस महकमे में एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने बाढ़ अनुमंडल के सम्यागढ़ थाने के थानाध्यक्ष सौरभ कुमार को 27 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए थाना परिसर से ही रंगे हाथ दबोच लिया। निगरानी विभाग की इस अचानक और ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इस मामले की पुष्टि निगरानी डीएसपी अरुणोदय पांडेय ने की है।

​जेसीबी चलाने के एवज में मांगी जा रही थी घूस

​यह पूरा मामला सम्यागढ़ थाना क्षेत्र में जेसीबी मशीन के संचालन से जुड़ा हुआ है। प्रहलादपुर निवासी मनोज कुमार द्वारा क्षेत्र में जेसीबी चलाने की अनुमति मांगने और निर्बाध रूप से काम करने के एवज में थानाध्यक्ष सौरभ कुमार द्वारा लगातार घूस की मांग की जा रही थी। थानाध्यक्ष प्रति सप्ताह 18 हजार रुपये की अवैध रकम मांग रहे थे और पैसे न मिलने पर जेसीबी को जब्त करने या काम बंद कराने की धमकी दे रहे थे।

​निगरानी विभाग में की गई थी शिकायत

​परेशान होकर प्रहलादपुर निवासी मनोज कुमार ने 26 जून को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में इसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले की गंभीरता को समझते हुए इसका आंतरिक सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान थानाध्यक्ष द्वारा रिश्वत मांगे जाने का आरोप पूरी तरह से सही पाया गया, जिसके बाद निगरानी ने जाल बिछाने की योजना तैयार की।

​थाना परिसर में विजिलेंस टीम ने बिछाया जाल

​तय योजना के मुताबिक, जैसे ही थानाध्यक्ष सौरभ कुमार ने थाना परिसर के भीतर शिकायतकर्ता मनोज कुमार से 27 हजार रुपये की रिश्वत की रकम स्वीकार की, पहले से घात लगाकर बैठी निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने उन्हें तुरंत दबोच लिया। इस छापेमारी दल में डीएसपी अरुणोदय पांडेय के साथ-साथ डीएसपी आदित्य राज और कई सब-इंस्पेक्टर शामिल थे। सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से मौके पर मोकामा थाने की टीम भी पहुंच गई थी। गिरफ्तारी के बाद आरोपी थानाध्यक्ष को मोकामा ले जाकर मेडिकल जांच कराई गई और आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए निगरानी टीम उन्हें अपने साथ पटना ले गई।

​थानाध्यक्ष ने खुद को बताया पूरी तरह बेकसूर

​गिरफ्तारी के बाद आरोपी थानाध्यक्ष सौरभ कुमार ने मीडिया और अधिकारियों के सामने खुद को पूरी तरह बेगुनाह बताया। उन्होंने दावा किया कि शिकायतकर्ता मनोज कुमार अवैध बालू खनन और अन्य अवैध गतिविधियों में लिप्त है। थानाध्यक्ष का आरोप था कि मनोज ने अपनी निजी खुन्नस और पुरानी रंजिश के चलते एक सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें इस झूठे मामले में फंसाया है। हालांकि निगरानी ब्यूरो ने शुरुआती जांच और ट्रैप के आधार पर उनके इन दावों को खारिज कर दिया है।