बिलासपुर। संभाग के शिक्षा विभाग में प्रशासनिक व्यवस्थाओं की अजीब तस्वीर सामने आ रही है। एक ओर जहां जिले समेत पूरे संभाग के सरकारी हायर सेकेंडरी और हाई स्कूलों में प्राचार्यों के पद खाली पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर संयुक्त संचालक (जेडी) कार्यालय में नियमों को ताक पर रखकर जरूरत से ज्यादा सहायक संचालकों का जमावड़ा लगा हुआ है। वहां 3 के स्थान पर 7 प्राचार्यों को सहायक संचालक बनाकर बैठा दिया गया है।
एक तरफ जिला मुख्यालय पर अफसरों की फौज बैठी है, तो दूसरी तरफ जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कई शासकीय हायर सेकेंडरी और हाई स्कूलों में प्राचार्यों के पद खाली पड़े हैं। इन स्कूलों में प्रशासनिक नियंत्रण और शैक्षणिक मॉनिटरिंग के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्कूलों का संचालन प्रभावित हो रहा है। हालात यह हैं कि स्वीकृत पदों से दोगुने से अधिक सहायक संचालक केवल जेडी ऑफिस में जमे हुए हैं, जबकि मैदानी स्तर पर स्कूलों की कमान संभालने वाला कोई जिम्मेदार नहीं है।

नियमानुसार जेडी कार्यालय में प्रशासनिक कार्यों के संचालन के लिए सहायक संचालकों के मात्र 3 पद स्वीकृत हैं। इसके बावजूद वर्तमान में इस कार्यालय में पूरे 7 सहायक संचालक पदस्थ हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से अधिकांश अधिकारी प्राचार्य वर्ग के हैं, जिन्हें स्कूलों में शैक्षणिक और प्रशासनिक नेतृत्व संभालना चाहिए था, लेकिन वे कार्यालयीन व्यवस्थाओं में जमे हुए हैं।
जब उच्च पदस्थ योग्य प्राचार्य और सहायक संचालक स्तर के अधिकारी कार्यालयों में ही बैठे रहेंगे, तो स्कूलों की व्यवस्था कौन संभालेगा। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि मैदानी अमले और शिक्षण संस्थानों में अमले की कमी न हो, इसके बावजूद प्रशासनिक कुप्रबंधन के चलते योग्य अधिकारियों को स्कूलों में भेजने के बजाय दफ्तरों में बैठाकर रखा गया है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस विसंगति को दूर कर कब तक प्राचार्यों को उनकी मूलस्थापना यानी स्कूलों में भेजता है ताकि शिक्षण व्यवस्था पटरी पर लौट सके ।
संयुक्त संचालक अश्विनी भारद्वाज ने बताया कि जेडी ऑफिस में तीन सहायक संचालकों के पद स्वीकृत है। उसके स्थान पर शासन ने सात सहायक संचालकों की पोस्टिंग की है। उक्त निर्णय शासन का है। इसलिए सभी सहायक संचालकों को आवश्यकतानुसार काम सौप दिए गए है। उक्त संबंध में उचित निर्णय शासन को लेना होगा।
तलाक की पूर्व कार्यवाही में सहमति वापस लेना क्रूरता नहीं
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति की ओर से क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की मांग वाली अपील खारिज कर दी है। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की डिवीजन बेंच ने कहा कि पत्नी पर लगाए गए आरोपों को पति ठोस साक्ष्यों से साबित नहीं कर सका। लंबे समय तक अलग रहने मात्र से पत्नी द्वारा परित्याग नहीं माना जा सकता।
जगदलपुर निवासी संजीव गुरुवारा ने पत्नी पूर्णिमा खरे गुरुवारा उर्फ हेमा खरे गुरुवारा के खिलाफ फैमिली कोर्ट, बस्तर में तलाक की अर्जी लगाई थी। पति का आरोप था कि पत्नी अपमानित करती थी, झगड़ा करती थी और झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी देती थी। उसने यह भी कहा कि पत्नी के व्यवहार से परेशान होकर वह जुलाई 2018 से अलग रह रहा है। पत्नी ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि पति ने ही उसे और बच्चों को उपेक्षित किया तथा उनके साथ हिंसा और दुर्व्यवहार किया ।
हाईकोर्ट ने पाया कि दंपती के बालिग बच्चों ने भी पिता के नियमित घर आने और खाना खाने की बात कही थी, इससे पति के लगातार अलग रहने के दावे को समर्थन नहीं मिला। डीबी ने स्पष्ट किया कि तलाक के लिए मानसिक क्रूरता और परित्याग के कानूनी आधारों को साबित करना जरूरी है। आपसी सहमति से तलाक की पूर्व कार्यवाही में सहमति वापस लेना अपने आप में क्रूरता नहीं है । इसी तरह, विवाह का पूरी तरह टूट जाना भी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत हाईकोर्ट में तलाक देने का स्वतंत्र आधार नहीं है।
बैंक में बंधक दुकान को बेचा, आरोपी गिरफ्तार
बिलासपुर। बैंक में बंधक रखी दुकान को बिना जानकारी दिए दूसरे व्यक्ति को बेचने और रजिस्ट्री कराकर धोखाधड़ी करने के आरोप में तारबाहर पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने वृंदावन कॉम्प्लेक्स स्थित दुकान को बैंक ऑफ इंडिया में बंधक रखकर ऋण लिया था। इसके बावजूद उसने बैंक की अनुमति के बिना दुकान को 21 लाख 11 हजार रुपए में बेच दिया।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया। पुलिस के अनुसार, मामले में प्रार्थी सूरज कुमार (41), निवासी सेक्टर-24, नया रायपुर ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि विद्यानगर, बिलासपुर निवासी फनीन्द्र मिश्रा उर्फ फणीन्द्र (55) ने 16 अक्टूबर 2020 को वृंदावन कॉम्प्लेक्स के प्रथम तल पर स्थित दुकान नंबर ए-308 को बैंक ऑफ इंडिया की व्यापार विहार शाखा में बंधक रखकर ऋण लिया था। बैंक और आरोपी के बीच हुए समझौते के अनुसार, संपत्ति बैंक में बंधक रहने तक उसे किसी अन्य व्यक्ति को बेचा नहीं जा सकता था।
आधा दर्जन थानेदारों को एसएसपी ने इनाम देकर किया पुरस्कृत
बिलासपुर। गंभीर अपराधों की विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्य और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाकर आरोपियों को सजा दिलाने, अपराधी पकड़ने समेत अन्य बेहतर काम करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को एसएसपी ने सम्मानित किया है। पॉक्सो, हत्या और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मामलों में मजबूत चार्जशीट पेश करने वाले 25 पुलिसकर्मियों को नगद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिए गए हैं।
इन मामलों में अदालतों ने आरोपियों को 20 साल के कठोर कारावास से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा सुनाई है। सम्मान पाने वालों में टीआई देवेश सिंह राठौर का प्रदर्शन प्रमुख रहा। इसके अलावा टीआई प्रदीप आर्य, निलेश पाण्डेय, दामोदर मिश्रा समेत अन्य निरीक्षकों को पुरस्कृत किया गया है। इनाम पाने वाले निरीक्षक रजनीश सिंह को पॉक्सो के एक मामले में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दिलाने पर 2 हजार रुपए दिए गए।
निरीक्षक दामोदर मिश्रा को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा दिलाने पर 1 हजार रुपए और निरीक्षक निलेश पांडेय को पॉक्सो के मामले में 20 साल की सजा दिलाने पर 1 हजार रुपए का पुरस्कार मिला। उप निरीक्षक रामनरेश यादव को एनडीपीएस के मामले में चार आरोपियों को 15-15 साल की सजा दिलाने पर 2 हजार रुपए दिए गए।
उप निरीक्षक राज सिंह को हत्या के मामले में उम्रकैद और मीना ठाकुर को पॉक्सो के मामले में 20 साल की सजा दिलाने पर 1- 1 हजार रुपए का पुरस्कार मिला। जीएल चंद्राकर को पॉक्सो के मामले में आठ साल की सजा दिलाने पर 1 हजार रुपए दिए गए। वहीं बसंत साहू को 900 रुपए तथा संतरा चौहान और नारायण ठाकुर को 500-500 रुपए से पुरस्कृत किया गया।
एएसआई और हेड कांस्टेबलों को भी मिला पुरस्कार
एएसआई गुलाबचंद पटेल और रमेश ओरके को 1-1 हजार रुपए, देवेंद्र तिवारी को 800 रुपए तथा विजय शर्मा को 600 रुपए दिए गए। इसी तरह हेड कांस्टेबल रामायण सिंह और सत्यप्रकाश यादव को 1-1 हजार रुपए, भुवनेश्वर मरावी को 500 रुपए तथा रमेश आदिले और परमेश्वर ठाकुर को 200-200 रुपए का नकद पुरस्कार दिया गया।
280 स्टेशनों व प्रमुख परिसरों में पेयजल स्रोतों की जांच
बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा नवरात्रि मेले के दौरान यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से व्यापक जांच एवं निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। महाप्रबंधक तरुण प्रकाश के मार्गदर्शन के निर्देश में संचालित इस विशेष अभियान के अंतर्गत रेलवे के सभी स्टेशनों एवं प्रमुख परिसरों में पेयजल की गुणवत्ता, उपलब्धता, स्वच्छता और रखरखाव व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्रधान मुख्य चिकित्सा निदेशक डॉ. देवेश कुमार एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मंगला नारायण के निर्देशन में पेयजल की गुणवत्ता की व्यापक जांच की जा रही है। स्वास्थ्य निरीक्षक द्वारा मौके पर ही पेयजल में अवशिष्ट क्लोरीन एवं कुल घुलित ठोस पदार्थों की जांच की गई। साथ ही जीवाणु एवं रासायनिक परीक्षण के लिए पेयजल के नमूने भी संकलित किए जा रहे है। इस अभियान के अंतर्गत नवरात्रि मेले के प्रमुख स्टेशन डोंगरगढ़ सहित विभिन्न स्टेशनों पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, खाद्य संरक्षा अधिकारियों एवं स्वास्थ्य निरीक्षकों द्वारा अन्य संबंधित विभागों के निरीक्षकों के समन्वय से निर्धारित स्थलों का निरीक्षण किया जा रहा है। इस दौरान पेयजल की उपलब्धता, गुणवत्ता एवं वितरण व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच कर आवश्यकतानुसार सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
कॉलोनी, कार्यालयों, अस्पतालों में चलाया अभियान
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के सभी 280 स्टेशनों के साथ रेलवे कॉलोनियों, अस्पतालों, कार्यालयों एवं अन्य प्रमुख परिसरों में उपलब्ध प्रत्येक पेयजल स्रोत को इस अभियान में शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत नल, वाटर कूलर, वाटर बूथ, वाटर फिल्टर सहित विभिन्न पेयजल सुविधाओं का निरीक्षण एवं नियमित निगरानी की जा रही है, ताकि यात्रियों, रेल कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
डिब्बों में फंगस लगी आइसक्रीम मिली, मौके पर ही किया गया नष्ट
बिलासपुर। त्योहारी सीजन के मद्देनजर जन स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने जिले के विभिन्न प्रतिष्ठानों में छापा मारकर जांच की कार्रवाई की गई। इस दौरान मौके पर मिले 85 फंगस युक्त आइसक्रीम के डिब्बों को नष्ट किया गया। और कुटू आटा और सिंघाड़ा आटा का नमूना लिया गया। उसे परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया।
आगामी त्योहारी सीजन को दृष्टिगत रखते हुए जनस्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा जिले के विभिन्न प्रतिष्ठानों में सघन निरीक्षण एवं जांच अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा दल ने मंदिर चौक स्थित इंस्टाकार्ट प्राइवेट लिमिटेड का आकस्मिक निरीक्षण किया।
त्योहारों में व्रत व उपवास के दौरान उपयोग होने वाले कुट्टू आटा और सिंघाड़ा आटा की की गुणवत्ता (लीगल) नमूने विधिवत एकत्र किए गए। जांच हेतु दोनों के विधिक निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान में संधारित अमूल शालीमार आइसक्रीम में फंगस ( फफूंद ) लगा पाया गया।
जनस्वास्थ्य के प्रति जोखिम को देखते हुए विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फंगस युक्त कुल 85 डिब्बे (प्रत्येक 68 ग्राम) को मौके पर ही विनष्ट कराया। साथ ही विस्तृत गुणवत्ता परीक्षण के लिए इसका सविलास सैंपल लेकर प्रयोगशाला (लैब) प्रेषित किया गया।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

