पेंड्रा। पेंड्रा शहर की खस्ताहाल और गड्ढों में तब्दील हो चुकी सड़कों की मरम्मत की मांग को लेकर गुरुवार को नगरवासियों ने लोक निर्माण विभाग (ढहऊ) कार्यालय का घेराव किया। शहर की प्रमुख सड़कों की बदहाली के कारण आम नागरिकों को लंबे समय से आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढों के कारण दुर्घटना की आशंका बनी हुई है, वहीं कई स्थानों पर यातायात बाधित होने की स्थिति भी निर्मित हो रही है।

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नगरवासियों ने कहा कि पेंड्रा शहर की प्रमुख सड़कें वर्तमान में अत्यंत जर्जर स्थिति में हैं। इन सड़कों से प्रतिदिन स्कूली बच्चे, व्यापारी, नौकरीपेशा लोग और आम नागरिक आवागमन करते हैं। आगामी नवरात्र पर्व को देखते हुए शहर में श्रद्धालुओं और नागरिकों की आवाजाही और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में सड़कों की तत्काल मरम्मत आवश्यक है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने आंदोलनकारियों और प्रतिनिधिमंडल से चर्चा की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि नवरात्र पर्व से पहले शहर की प्रमुख सड़कों के गड्ढों को भरने तथा आवश्यक मरम्मत कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। यह आंदोलन नगर पंचायत पेंड्रा के प्रथम अध्यक्ष इकबाल सिंह उपोवेजा एवं नगर पालिका परिषद पेंड्रा के अध्यक्ष राकेश जालान के संयुक्त नेतृत्व में किया गया।

इकबाल सिंह उपोवेजा ने कहा, “सड़कें किसी भी शहर की लाइफलाइन होती हैं। पेंड्रा की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। यदि निर्धारित समय सीमा में कार्य नहीं हुआ तो जनहित में आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। राकेश जालान ने कहा, “हम विभाग के आश्वासन का सम्मान करते हैं और उम्मीद करते हैं कि यह केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निर्धारित समय में सड़क मरम्मत का कार्य धरातल पर दिखाई देगा।

इस अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष प्रशांत श्रीवास, सादिक खान, भाजपा नेता महेंद्र शुक्ला, पारस चौधरी, जलेश सिंह, विद्या राठौर, मंजू सिंह ठाकुर, प्रेमवती कोल, सीमा नागेश, राजकुमार रजक, रमेश कोल, मैकू भरिया, शशांक शर्मा, आयुष्मान शर्मा, अमित ताम्रकार, अविनाश सोनी, सालू खान सहित बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे।

हाईकोर्ट का फैसला: पहले से स्वीकृत स्टडी लीव 24 से 36 महीने नहीं होगी

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा के लिए पहले ही 24 महीने की स्टडी लीव ले चुके 14 डॉक्टरों को राहत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने स्पष्ट किया कि 3 मार्च 2025 के सरकारी आदेश से अध्ययन अवकाश की अधिकतम अवधि 36 महीने किए जाने का लाभ पहले स्वीकृत और उपयोग की जा चुकी छुट्टी पर पिछली तारीख से लागू नहीं होगा। कोर्ट ने इस संबंध में दायर रिट याचिकाएं खारिज कर दीं।

इस मामले में डॉ. भूमिका देवांगन, डॉ. सरिता मौर्य, डॉ. सुनीति जेम्स सहित अन्य डॉक्टरों ने याचिकाएं दायर कर अध्ययन अवकाश की अवधि 24 से बढ़ाकर 36 महीने करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि, उन्होंने विभाग से विधिवत अनुमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र लेकर स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा प्राप्त की थी।

समान परिस्थिति वाले डॉक्टरों को बढ़ी हुई अवधि का लाभ दिए जाने के आधार पर उन्होंने समान व्यवहार की मांग की। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दलील दी कि 3 मार्च 2025 का आदेश लाभकारी है और इसके तहत अध्ययन अवकाश की अधिकतम अवधि बढ़ाई गई है। उनका यह भी कहना था कि, बाद में जारी 6 अप्रैल 2026 के स्पष्टीकरण से मूल आदेश के दायरे को सीमित नहीं किया जा सकता ।

समान स्थिति वाले डॉक्टरों को लाभ नहीं देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन बताया गया । हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं को 3 मार्च 2025 के आदेश से पहले ही 24 महीने का अध्ययन अवकाश स्वीकृत हो चुका था और वे इसका लाभ भी ले चुके थे। इसके बाद उन्हें अतिरिक्त अवधि के लिए असाधारण अवकाश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि नए आदेश में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिससे पहले स्वीकृत अध्ययन अवकाश को स्वतः 36 महीने का माना जाए या असाधारण अवकाश को अध्ययन अवकाश में बदला जा सके।

अतिरिक्त लाभ देने का स्वतंत्र आधार नहीं कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 13 जून 2025 का विभागीय आदेश, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया था, याचिकाकर्ताओं को अतिरिक्त लाभ देने का स्वतंत्र आधार नहीं बन सकता। 6 अप्रैल 2026 का पत्र मूल आदेश के क्रियान्वयन संबंधी स्पष्टीकरण है। सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित शर्तों से आगे लाभ देने के लिए समानता के सिद्धांत का सहारा नहीं लिया जा सकता ।

जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने कहा कि, याचिकाकर्ता अपने पहले से स्वीकृत अध्ययन अवकाश को पिछली तारीख से 12 महीने बढ़ाने का कानूनी अधिकार साबित नहीं कर सके। कोर्ट ने सभी संबंधित रिट याचिकाएं खारिज कर दीं।

अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई, दो आरोपियों को जेल और जुर्माना

बिलासपुर। जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन पर नकेल कसने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत प्रशासन और पुलिस विभाग को बड़ी सफलता मिली है। इस अभियान के तहत कुल 66 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें से एक महत्वपूर्ण मामले में विशेष न्यायालय खान और खनिज द्वारा आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 1 साल के कठोर कारावास और 25,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।

कलेक्टर के निर्देशानुसार खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों कोटा, रतनपुर, सीपत, सिविल लाइन, सरकंडा, मस्तूरी, पचपेड़ी, चकरभाठा और हिर्री में अवैध उत्खनन व परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की थी। सभी मामले माननीय न्यायालय में प्रक्रियाधीन थे।

इनमें से एक मामला 16 अक्टूबर 2025 का था, जिसमें आरोपी जलेश्वर कश्यप पिता सुखदेव कश्यप, निवासी खैरा डगानिया, थाना सीपत और अमर कुमार केंवट पिता संतकुमार केंवट, निवासी चोरहादेवरी, थाना रतनपुर को ग्राम खैरा डगानिया में ट्रैक्टर- ट्रॉली वाहन क्रमांक सीजी 10 जे 0553 से अवैध रूप से रेत का परिवहन करते पकड़ा गया था। ट्रैक्टर-ट्रॉली को सीपत थाने की अभिरक्षा में रखा गया था।

तीस सितबंर को न्यायालय, विशेष न्यायाधीश, खान और खनिज विकास और विनियमन अधिनियम 1957, जिला बिलासपुर द्वारा इस मामले में फैसला सुनाया गया। न्यायालय ने दोनों आरोपियों जलेश्वर कश्यप एवं अमर कुमार केंवट को भारतीय न्याय संहिता की धारा 303 (2) सहपठित 3(5) के तहत 1 वर्ष का कठोर कारावास एवं 1000 रूपए अर्थदंड तथा खान और खनिज अधिनियम 1957 की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत 25,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। इस सख्त अदालती कार्रवाई से अवैध उत्खनन और परिवहन करने वालों में भय बनेगा और जिले में अवैध खनन की गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अटल और दुर्ग विश्वविद्यालय के बीच हुआ शैक्षणिक समझौता

बिलासपुर। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, दुर्ग के बिलासपुर और हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, बीच शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर गुरुवार को हस्ताक्षर किए गए। पांच वर्ष के लिए हुए इस समझौते का उद्देश्य विद्यार्थियों और प्राध्यापकों के लिए सहयोग के नए अवसर विकसित करना है।

समझौते पर बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) ललित प्रकाश पटैरिया और दुर्ग विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजय तिवारी ने हस्ताक्षर किए। इसके तहत संयुक्त शोध परियोजनाओं, अकादमिक नवाचार, विद्यार्थी इंटर्नशिप और प्राध्यापक आदान- प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के अनुरूप दोनों विश्वविद्यालय संयुक्त संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों का भी आयोजन करेंगे। इससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव तथा शोध गतिविधियों में सहभागिता के अवसर मिल सकेंगे। कार्यक्रम का समन्वय एमओयू प्रकोष्ठ के समन्वयक डॉ. यशवंत कुमार पटेल ने किया।

निगम दफ्तर में दीवारों से हटाए जाले, फाइलों का किया संधारण

बिलासपुर। स्वच्छता की शुरूआत घर से की थीम के साथ नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारियों ने स्वच्छता दिवस के एक दिन पूर्व आज कार्यालय के सभी शाखाओं और भवनों की सफाई की। विदित है कि 17 सितंबर से स्वच्छता ही सेवा और सेवा संकल्प अभियान चल रहा है, इसी तारतम्य में निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने सभी विभाग प्रमुखों, कर्मचारियों और जोन कमिश्नर को अपने अपने कार्यालयों की साफ-सफाई करने के निर्देश दिए थे।

सफाई अभियान के दौरान भवन की सफाई के साथ-साथ, बरसों से पड़े फाइलों की सफाई और व्यवस्थित संधारण करने के भी निर्देश दिए थे। जिसके बाद आज निगम कर्मचारियों और विभाग प्रमुखों ने सुबह 7 बजे से ऑफिस पहुंचकर सफाई अभियान चलाया।

सीएमडी कॉलेज के प्राचार्य ने पुलिस को किया गुमराह

बिलासपुर। तारबाहर थाना क्षेत्र के सीएमडी कॉलेज में एक छात्र पर चाकू से हमले के मामले में पुलिस ने कॉलेज प्रबंधन से जानकारी मांगी तो प्राचार्य संजय सिंह ने ऐसी कोई घटना नहीं होने की बात कही। कॉलेज प्रशासन इस घटना को नकारते हुए पुलिस को गुमराह कर रहा है। जबकि यह जानकारी भी मिल रही है कि घायल छात्र का इलाज भी किसी अस्पताल में चल रहा है। कॉलेज

कैंपस परिसर में चाकू से हमले की जानकारी के बाद तारबाहर पुलिस हरकत में आ गयी है। वहीं आसपास इलाकों में पेटोलिंग के माध्यम से इसकी जानकारी लगा रही है।

गौरतलब हो कि शहर के सीएमडी कॉलेज में बुधवार को चाकूबाजी की घटना सामने आने से कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए है। मिली जानकारी अनुसार परिसर में एक छात्र पर दूसरे युवक ने चाकू से हमला कर दिया। घटना के बाद कालेज अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

बताया जा रहा है कि मामले की जानकारी कॉलेज प्रशासन को होने के बाद भी घटना की सूचना पुलिस को नहीं दी गई। इससे में कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे है। बताया जा रहा है कि हमले में छात्र को चोट आई है। जिसे गुपचुप तरीके से अस्पताल पहुंचा दिया गया। हालांकि, घटना के वास्तविक कारण और घायल छात्र की स्थिति को लेकर कॉलेज प्रशासन चुप्पी बनाए हुए है। वहीं पुलिस को सूचना नहीं दिए जाने की बात भी चर्चा में है।

सीसीटीवी से खुल सकता है राज

सीएमडी कॉलेज में छात्र के साथ हुए हमले में कॉलेज में लगे सीसीटीवी कैमरों से घटना की जानकारी लग सकती है। फिलहाल कॉलेज प्रशासन ने पुलिस को अब तक सीसीटीवी फुटेज नहीं दिखाया है। वहीं पुलिस भी सीसीटीवी फुटेज खंगालने को लेकर सक्रिय नहीं दिखी। सिर्फ पेट्रोलिंग करके मामले को हल्के में लिया जा रहा है।

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