रायपुर। कुछ खास व्यक्तित्व की जीवन यात्रा हजारों अन्य युवकों के लिए प्रेरणा पथ बनती है। छत्तीसगढ़ सरकार में वित्त मंत्री के रूप में कार्यरत एक भारतीय राजनीतिज्ञ ओमप्रकाश चौधरी एक ऐसा ही नाम है, जिसने संघर्ष, संकल्प और सेवा के बल पर अपने जीवन को एक मिसाल में बदल दिया। आज ओपी चौधरी के जन्मदिन 2 जून के अवसर पर यह बात कही जा सकती है कि वे केवल एक सफल राजनेता या पूर्व आईएएस अधिकारी के अलावा नए भारत के उस युवा चेहरे का प्रतीक भी हैं, जो प्रदेश में आमूलचूल बदलाव लाने का माद्दा रखते हैं।
अभावों के साथ रायगढ़ जिले के छोटे से गांव बायांग में जन्मे ओपी चौधरी का बचपन संघर्षों वाला रहा। आठ साल की उम्र में पिता का साया उठ गया यह सब किसी भी बच्चे के जीवन की सबसे कठिन परीक्षा होती है। उनकी माता कौशल्या देवी ने सीमित संसाधनों के बावजूद जिस साहस और समर्पण से उनका पालन-पोषण किया शायद मां की यह तपस्या ही उनके जीवन की असली नींव बनी। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले ओमप्रकाश ने यह साबित किया कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती।

गणित विषय में स्नातक करने के बाद कच्ची उम्र में ही उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण करके भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रवेश लिया। इन असाधारण उपलब्धियों के अलावा सबसे उल्लेखनीय रहा उनका शानदार सेवा काल। 13 वर्षों तक उन्होंने जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अनुकरणीय निर्वहन किया।
दंतेवाड़ा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कलेक्टर के रूप में उन्होंने जो काम किया उसकी चर्चा आज भी होती है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में उन्होंने ‘तमन्ना’, ‘नन्हे परिंदे’, ‘छू लो आसमान’ और ‘लाइवलीहुड कॉलेज’ जैसी योजनाओं के माध्यम से शिक्षा और कौशल विकास को एक नई और अनछुई दिशा दी। इस नई शुरुआत ने न केवल स्थानीय युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा बल्कि देश-विदेश में भी उसकी सराहना हुई। यह भी एक कारण था कि ओपी चौधरी को लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

रामचरित मानस की एक चौपाई “नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं। प्रभुता पाई जाहि मद नाहीं॥” अर्थात् संसार में सत्ता पाकर अहंकार से बचना बहुत कठिन है। मगर यह भी सत्य है कि जिसने इसे साध लिया उसका सफ़ल होना निश्चित हो जाता है। ईसी सिलसिले में हम छत्तीसगढ़ सरकार के वित्त मंत्री ओम प्रकाश चौधरी का नाम ले सकते हैं।
रायपुर नगर निगम आयुक्त के रूप में ओपी चौधरी ने शहर को आधुनिक और स्वच्छ बनाने की दिशा में कई नए काम किए। ‘ऑक्सी-रीडिंग जोन’, ‘100 स्मार्ट स्कूल’ और कैरियर मार्गदर्शन कार्यक्रम जैसी कोशिशों ने यह दिखाया कि प्रशासनिक दृष्टि से केवल व्यवस्थायें ही नहीं चलती बल्कि उससे समाज भी आगे बढ़ता है।
वर्ष 2018 में आईएएस जैसी प्रतिष्ठित सेवा से इस्तीफा देकर उनका राजनीति में प्रवेश करने वाला उनका निर्णय सभी को चौंकाने वाला था। उनके इस कदम को बहुतों ने जोखिम भरा कहा मगर यही कदम उनके लिए एक स्वाभाविक विस्तार का आरम्भ साबित हुआ। वे केवल नीतियों को लागू करने वाले अधिकारी ही नही थे बल्कि उन नीतियों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने वाले भी रहे।
राजनीति में उनका प्रारंभिक सफर कठिनाइयों से भरा रहा। वर्ष 2018 का चुनाव हारने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नही हारी। ओपी चौधरी के इसी जज़्बे ने उन्हें 2023 में रायगढ़ विधानसभा से शानदार जीत दिलाई। इसके बाद उन्हें छत्तीसगढ़ सरकार में वित्त मंत्री जैसा महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया। ऐसी जिम्मेदारी जो केवल एक पद नहीं बल्कि राज्य के आर्थिक भविष्य को दिशा देने का अवसर भी था।

वित्त मंत्री के रूप में आज भी ओपी चौधरी के सामने कई चुनौतियां हैं जैसे राज्य के संसाधनों का संतुलित उपयोग, विकास और कल्याण योजनाओं के बीच संतुलन और नई आर्थिक संभावनाओं का निर्माण करना। लेकिन उनके पिछले कार्यों के अनुभव और दृष्टिकोण को देखते हुए यह भरोसा किया जा रहा है कि वे इन चुनौतियों को भी अवसर में बदल देंगे।
ओपी चौधरी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी ज़मीनी समझ और नूतन सोच है। वे आंकड़ों और योजनाओं की भाषा के इतर लोगों की आकांक्षाओं के अनुरुप भी बात करते हैं। यही कारण है कि वे युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। उनकी कार्यशैली में नज़र आने वाली पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणामोन्मुख दृष्टिकोण उनको सब से अलग ला कर खड़ा करती है।
आज जब देश और राज्य तेजी से बदल रहे हैं तब ही परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बना कर चलने वाले नेतृत्व की आवश्यकता सबसे अधिक होती है। इस संतुलन के प्रतीक हैं ओपी चौधरी। गांव की मिट्टी से जुड़े रहने वाले ओपी चौधरी की सोच आश्चर्यजनक रूप से वैश्विक है तभी वे प्रशासनिक अनुशासन के साथ राजनीतिक संवेदनशीलता का भी आसानी से समन्वय कर लेते हैं।

उनका जीवन यह संदेश देने वाला है कि संघर्ष, मेहनत और ईमानदारी ही वह रास्ता है जो आपको मंजिल तक पहुंचाता है और सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। एक छोटे से गांव से निकलकर आईएएस अधिकारी बनना और फिर राजनीति में अपनी पहचान स्थापित करना कतई आसान नही था मगर उनकी यह यात्रा युवाओं को प्रेरणा देने वाली ही कि बड़े सपने किसी भी हाल में देखी जा सकती है।
उनके जन्मदिन पर इस बात का सम्प्रेषण ज़रूरी हो जाता है कि ओपी चौधरी केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचार हैं जो यह विश्वास दिलाता है कि साफ़ नीयत और स्पष्ट उद्देश्य से हर बाधा को पार किया जा सकता है। उम्मीद की जा रही है आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ के विकास में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण होगी, वे अपने अनुभव, ऊर्जा और दूरदर्शिता के साथ राज्य को सफलता के नए सोपान से एक नई ऊंचाई तक ले जाएंगे। बड़े बदलाव का सपना देखकर उसे साकार करने का साहस रखने वाले, माटी से मंत्रिमंडल तक का प्रेरक सफर तय करने वाले ओपी चौधरी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।

संदीप अखिल, सलाहकार संपादक न्यूज 24 मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

