पटना की राजनीतिक गलियारों में इन दिनों बयानों के तीर खूब चल रहे हैं। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं। इस बार वह अपने भाई और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव तथा एनडीए के वरिष्ठ नेता जीतन राम मांझी के बीच छिड़ी जुबानी जंग में कूद पड़ी हैं। रोहिणी का इस विवाद में कूदना इसलिए भी खास चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि कुछ समय पहले उनके और तेजस्वी यादव के बीच दूरियों की खबरें सामने आई थीं। अब रोहिणी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए जीतन राम मांझी पर तीखा हमला बोला है।

​क्या है पूरा विवाद और क्रोनोलॉजी?

  • ​इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की शुरुआत 17 अगस्त को हुई, जब माउंटेन मैन दशरथ मांझी की पुण्यतिथि के अवसर पर राजद कार्यालय में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया था।
  • ​इस कार्यक्रम के दौरान पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव राजद समर्थकों को संबोधित कर रहे थे।
  • ​संबोधन के दौरान तेजस्वी यादव से एक चूक हो गई और उन्होंने दशरथ मांझी की जगह गलती से जीतन राम मांझी का नाम बोल दिया।
  • ​इस छोटी सी जुबान की फिसलन को एनडीए के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने तुरंत लपक लिया और सोशल मीडिया पर तीखा तंज कसते हुए कह दिया कि तेजस्वी की रात वाली उतरी नहीं है। उनका यह सीधा इशारा परोक्ष रूप से शराब पीने की ओर था।

​रोहिणी आचार्य का तीखा पलटवार

​जीतन राम मांझी के इस बयान के सामने आने के कुछ ही घंटों बाद, सिंगापुर से रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक के बाद एक कई तीखे पोस्ट किए। उन्होंने जीतन राम मांझी को आड़े हाथों लेते हुए लिखा कि कहीं बीजेपी की श्रेयसी सिंह वाला नशा तो नहीं किया था प्रतिपक्ष के नेता? बीजेपी की श्रेयसी सिंह पर बोलने की औकात नहीं है सामंतियों के इस गुलाम जीतन राम मांझी की।
​रोहिणी ने आगे अपनी बात रखते हुए लिखा कि सम्मान उम्र देखकर नहीं, बल्कि आचरण को देखकर दिया जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो व्यक्ति उम्र में पिता के समान होने के बावजूद घटिया आचरण करे, वह आदर के योग्य नहीं होता।

​इस जंग में मंत्री श्रेयसी सिंह का जिक्र क्यों आया?

​इस पूरे विवाद में बिहार सरकार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह का नाम भी घसीटा गया है। दरअसल, 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान अपने प्रभार वाले जिले सीतामढ़ी में तिरंगा फहराते वक्त श्रेयसी सिंह की जुबान भी फिसल गई थी। उस दौरान उन्होंने गलती से महात्मा गांधी को राष्ट्रपति और लोक नायक जय प्रकाश नारायण को ‘जन प्रकाश’ कह दिया था।
​रोहिणी आचार्य ने इसी घटना का हवाला देते हुए जीतन राम मांझी को करारा जवाब दिया। रोहिणी का तर्क था कि जब सत्ताधारी दल बीजेपी की मंत्री से सार्वजनिक मंच पर जुबान फिसलने की गलती हो सकती है, तो प्रतिपक्ष के नेता से ऐसी चूक होना आम बात है। इसके जरिए उन्होंने जीतन राम मांझी के ‘नशे’ वाले बयान को पूरी तरह खारिज कर दिया और उन पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।