​सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान AK-47 से फायरिंग के गंभीर मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजधानी पटना में एक बड़ा और व्यापक राजभवन मार्च निकाला गया। इस विरोध प्रदर्शन में राजद के विधायक, सांसद, विधान पार्षद (MLC), वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ राज्य भर से आए हजारों छात्र और युवा शामिल हुए। मार्च के समापन के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्यपाल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर इस पूरी घटना की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

  • भव्य और विशाल मार्च का आयोजन: सुबह 10 बजे जेपी गोलंबर से शुरू हुआ यह मार्च बेली रोड से होते हुए लोक भवन तक पहुंचा, जिसकी अगुवाई खुद तेजस्वी यादव ने की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और न्याय की मांग की।
  • ​लालू यादव का तीखा हमला: राजद सुप्रीमो लालू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के माध्यम से युवाओं और कार्यकर्ताओं से एकजुट होने की अपील करते हुए सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला और शिक्षा व्यवस्था तथा रोजगार के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
  • ​सीवान DM और SP पर प्रशासनिक कार्रवाई: विवाद बढ़ने के बाद सीवान के डीएम विवेक रंजन मैत्रेय और एसपी पूरन कुमार झा को उनके पदों से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग में ‘वेटिंग फॉर पोस्टिंग’ भेज दिया गया है, हालांकि राजद ने इन अधिकारियों के महज तबादले से असंतुष्ट होकर उनके पूर्ण निलंबन की मांग की है।
  • ​सुप्रीम कोर्ट में कानूनी प्रक्रिया: इस संवेदनशील मामले की गूंज देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है, जहां बिहार पुलिस ने अपना जवाब दाखिल करते हुए घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं और परिस्थितियों पर अपनी सफाई पेश की है।

​राजधानी पटना में निकाले गए इस मार्च के दौरान राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर थी। तेजस्वी यादव ने पूर्व में प्रेसवार्ता कर सरकार से सीधा सवाल किया था कि बिना किसी ठोस आदेश के पुलिसकर्मियों को छात्रों पर AK-47 जैसे घातक हथियारों का इस्तेमाल करने का अधिकार किसने दिया। उन्होंने घायल छात्रों से मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पूरी तरह से संदेहास्पद है और केवल अधिकारियों के तबादले से काम नहीं चलेगा, बल्कि सीधी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
​दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बिहार पुलिस ने सफाई दी है कि भीड़ के बीच फंसे एक जवान ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हवा में गोलियां चलाई थीं, और प्रदर्शनकारियों को लगी चोटें उस हथियार से नहीं आई थीं। इसके बावजूद, घटना के वीडियो सामने आने और सार्वजनिक आलोचना के बाद पुलिस महकमे में भी आंतरिक जांच और निलंबन की कार्रवाई शुरू की गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की कानून-व्यवस्था और छात्र सुरक्षा के मुद्दों को एक बार फिर सबसे बड़ा राजनीतिक केंद्र बना दिया है।