अतीश दीपंकर, भागलपुर। जिले के सुल्तानगंज स्थित बिस्कोमान भवन में इन दिनों खेती के मुख्य सीजन को लेकर अन्नदाताओं की भारी बेचैनी साफ देखने को मिल रही है। खाद की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था की पोल खोलती तस्वीरें लगातार तीसरे दिन भी सामने आईं, जहां यूरिया और डीएपी (DAP) खाद हासिल करने के लिए किसानों का तांता लगा रहा। सरकारी स्तर पर किसानों को सुगमता से खाद उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

​डीएपी की भारी किल्लत और मनमाने दाम

​किसानों का आरोप है कि मौजूदा रबी या खरीफ सीजन में फसलों की सही पैदावार के लिए उन्हें यूरिया के साथ-साथ डीएपी खाद की सख्त जरूरत है। हालांकि, सरकारी केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में डीएपी उपलब्ध न होने के कारण उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। किसानों का यह भी दर्द है कि खुले बाजार में इस खाद की भारी कालाबाजारी हो रही है। जहां सरकार द्वारा निर्धारित आधिकारिक मूल्य मात्र 1,350 रुपये प्रति बोरी है, वहीं खुले बाजारों और बिचौलियों द्वारा किसानों को यही खाद 2,000 रुपये तक की भारी-भरकम कीमत पर खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

​ऑनलाइन प्रक्रिया और लंबी कतारों से बढ़ी दुश्वारियां

​बिस्कोमान भवन से खाद वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई है, लेकिन यह तकनीक किसानों के लिए जी का जंजाल बन गई है। किसानों का कहना है कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और प्रक्रिया पूरी करने में लंबा समय बर्बाद होता है, जिससे खाद के वितरण में भारी देरी होती है। नतीजतन, सुबह से ही भवन परिसर में किसानों की लंबी कतारें लग जाती हैं और देखते-देखते भारी भीड़ जमा हो जाती है। घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद कई किसानों को बैरंग लौटना पड़ता है। अन्नदाताओं ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि खाद वितरण की इस जटिल व्यवस्था को सरल बनाया जाए और समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद मुहैया कराई जाए।

​प्रशासनिक पक्ष: पर्याप्त उपलब्धता के दावे और कार्रवाई का आश्वासन

​किसानों की इन गंभीर शिकायतों और हंगामे के बीच जब प्रखंड कृषि पदाधिकारी सत्यम राज से बातचीत की गई, तो उन्होंने एक अलग ही तस्वीर पेश की। उनका कहना है कि क्षेत्र में डीएपी खाद की कोई कमी नहीं है और इसकी पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। यदि किसी कारणवश बिस्कोमान भवन से खाद नहीं मिल पा रही है, तो किसान नजदीकीृत बाजारों से भी खाद ले सकते हैं। अधिक कीमत वसूले जाने के आरोपों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक किसी भी किसान ने लिखित या मौखिक रूप से इस संबंध में शिकायत दर्ज नहीं कराई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि कोई भी किसान ब्लैक मार्केटिंग या अधिक कीमत वसूलने की शिकायत करता है, तो विभाग तुरंत मामले की गंभीरता से जांच कर सख्त कानूनी कार्रवाई करेगा।
​इस पूरी अफरा-तफरी और हंगामे के दौरान बिस्कोमान भवन परिसर में दर्जनों की संख्या में किसान मौजूद रहे। स्थिति को नियंत्रण से बाहर होने से रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा पुलिस बल की भी तैनाती करनी पड़ी, जो इस बात का प्रमाण है कि ज़मीन पर अन्नदाता किस कदर संकट से जूझ रहे हैं।