नवीन शर्मा, हांसी। हांसी में निजी बस ऑपरेटरों और रोडवेज विभाग के बीच सरकारी पास व्यवस्था को लेकर चल रहा विवाद अब और गहराता जा रहा है। इस टकराव का सीधा असर रोजाना सफर करने वाले छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और अन्य पास धारकों पर पड़ रहा है, जिन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकारी आदेशों के बावजूद निजी बस संचालकों ने रोडवेज पास मानने से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि वे फ्री या रियायती यात्रा नहीं दे सकते। इसके चलते कई यात्रियों को बसों से यह कहकर उतार दिया जा रहा है कि “यहां आपका पास मान्य नहीं है”।


छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों पर सबसे ज्यादा असर
सबसे ज्यादा परेशानी छात्रों और बुजुर्गों को झेलनी पड़ रही है।रोजाना कॉलेज जाने वाले छात्र किराया देकर सफर करने को मजबूर हैं। दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों को भी कोई राहत नहीं मिल रही. शिकायतों के बावजूद कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है.

निजी बस यूनियन का पक्ष : सरकारी मुआवजा नहीं, तो सुविधा क्यों?
निजी बस एसोसिएशन का कहना है कि रोडवेज को सरकार से वित्तीय सहायता मिलती है, जबकि निजी बस ऑपरेटरों को कोई मुआवजा नहीं दिया जाता। बिना भुगतान के फ्री या रियायती यात्रा देना आर्थिक रूप से संभव नहीं। यूनियन ने यह भी मांग रखी है कि सरकार नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) लागू करे, ताकि हर यात्रा का भुगतान डिजिटल तरीके से हो सके।

मामला अदालत में, 16 जुलाई को अगली सुनवाई
इस विवाद को लेकर निजी बस संचालकों ने अदालत का रुख किया है। मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को निर्धारित की गई है। तब तक स्थिति में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम ही दिख रही है।

प्रशासन पर भी सवाल, जिम्मेदारी से बचते अधिकारी?
स्थानीय स्तर पर परिवहन व्यवस्था की स्थिति को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों का आरोप है कि:

० शिकायतों के बावजूद कार्रवाई धीमी है
० अधिकारी केवल औपचारिकता निभा रहे हैं
० जमीनी स्तर पर समस्या जस की तस बनी हुई है

समाधान का इंतजार, परेशानी जारी
हांसी में जारी यह विवाद अब केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि आम जनता की रोजमर्रा की परेशानी बन चुका है। जब तक सरकार, निजी बस ऑपरेटर और प्रशासन के बीच कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकलता, तब तक यात्रियों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही।

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