Badminton World Championships 2026: राजधानी में 17 अगस्त से शुरू होने वाली बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम को पूरी तरह तैयार किया जा रहा है। खिलाड़ियों के लिए कोर्ट, दर्शकों के लिए बैठने की व्यवस्था और स्टेडियम की सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ आयोजकों के सामने एक ऐसी चुनौती भी है, जिसका जिक्र आमतौर पर किसी अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन की तैयारियों में नहीं होता, जाो है बंदर और कबूतर।

जनवरी में हुए इंडिया ओपन के दौरान स्टेडियम में बंदरों के पहुंचने और दर्शक दीर्घा में घूमने की घटनाओं ने आयोजकों की चिंता बढ़ा दी थी। इस बार ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्टेडियम में कई स्तर पर इंतजाम किए गए हैं।
बंदरों को दूर रखने के लिए तीन ऐसे लोगों को तैनात किया गया है, जिन्हें लंगूर की आवाज निकालने में महारत हासिल है। इन्हें आम बोलचाल में ‘मंकी व्हिस्परर’ कहा जाता है। ये लोग स्टेडियम और आसपास के इलाके में बंदरों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे और जरूरत पड़ने पर लंगूर की आवाज निकालकर उन्हें वहां से दूर करने की कोशिश करेंगे।
दिलचस्प बात यह है कि बंदरों के लिए किया गया यह इंतजाम अकेला नहीं है। स्टेडियम के सभी 16 प्रवेश द्वारों पर ऑटोमैटिक डबल-डोर सिस्टम लगाया गया है। वहीं कबूतरों को रोकने के लिए अमेरिका से नॉन-टॉक्सिक रिपेलेंट जेल मंगाई गई है। शिकारी पक्षियों की आवाज निकालने वाली मशीनें भी लगाई गई हैं।
जनवरी में इंडिया ओपन के दौरान बंदर पहुंचे थे दर्शकों के बीच

इस पूरे इंतजाम की शुरुआत जनवरी में हुए इंडिया ओपन के अनुभव से हुई। टूर्नामेंट के दौरान कुछ बंदर स्टेडियम के अंदर पहुंच गए थे। वे दर्शक दीर्घा में घूमते दिखाई दिए और कुछ समय के लिए मुकाबलों पर भी असर पड़ा।
घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैली थीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी चर्चा हुई। आयोजकों के लिए यह अनुभव खासा अहम था, क्योंकि अब भारत को एक और बड़े अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन आयोजन की मेजबानी करनी थी।
इस बार कोशिश है कि खेल के दौरान खिलाड़ियों और दर्शकों का ध्यान सिर्फ मुकाबलों पर रहे और किसी जानवर की वजह से मैच में व्यवधान की नौबत न आए।
असली लंगूर नहीं आएगा, इंसान निकालेगा उसकी आवाज
बंदरों को भगाने के लिए पहले कई जगहों पर असली लंगूरों का इस्तेमाल किया जाता था। रीसस मकाक बंदर लंगूर से दूरी रखते हैं। इसकी एक वजह लंगूर का बड़ा आकार और उसका व्यवहार माना जाता है।
लेकिन सार्वजनिक और सरकारी स्थानों पर बंदरों को भगाने के लिए असली लंगूरों के इस्तेमाल पर 2012 से रोक है। इसलिए अब इंसानों के जरिए लंगूर की आवाज की नकल करने का तरीका अपनाया जाता है।
इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में भी यही व्यवस्था रहेगी। तैनात किए गए कलाकार लंगूर की गुर्राहट और दूसरी आवाजों की नकल करेंगे। उम्मीद है कि आसपास मौजूद रीसस मकाक इन आवाजों को खतरे का संकेत मानकर इलाके से हट जाएंगे।
जफर बोले- पीढ़ियों से यही काम कर रहे हैं

इन मंकी व्हिस्परर में शामिल जफर के मुताबिक, लंगूर की आवाज निकालकर बंदरों को भगाने का काम उनके परिवार में पीढ़ियों से चला आ रहा है।
उनका कहना है कि उन्होंने दिल्ली के कई महत्वपूर्ण इलाकों में इस तरह की ड्यूटी की है। नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और राष्ट्रपति भवन के अलावा गुरुग्राम, चंडीगढ़ और मथुरा तक उन्हें इस काम के लिए बुलाया गया है।
जफर के मुताबिक, जिस जगह बंदरों की परेशानी होती है, वहां लंगूर की आवाज निकालकर उन्हें दूर रखने की कोशिश की जाती है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस तरह के एक असाइनमेंट के लिए मंकी व्हिस्परर को करीब 20 से 25 हजार रुपए तक मिल सकते हैं। हालांकि इस काम में सिर्फ आवाज निकालना ही जिम्मेदारी नहीं होती। बंदरों की गतिविधियों पर नजर रखना और जरूरत के समय उन्हें स्टेडियम से दूर रखना भी इसका हिस्सा है।
दिल्ली विधानसभा भी निकाल चुकी है मंकी व्हिस्परर का टेंडर
बंदरों से निपटने के लिए मिमिक की मदद लेना दिल्ली में कोई बिल्कुल नया प्रयोग नहीं है। इसी साल दिल्ली विधानसभा की ओर से भी इलाके में बंदरों की आवाजाही रोकने के लिए मिमिक को काम पर रखने का टेंडर जारी किया गया था।
यानी राजधानी में बंदरों की समस्या अब केवल रिहायशी इलाकों तक सीमित नहीं रही। सरकारी संस्थान और बड़े आयोजन भी इससे निपटने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं।
2023 में हुए G20 शिखर सम्मेलन के दौरान भी दिल्ली में बंदरों को दूर रखने के लिए लंगूर की आवाज निकालने वाले लोगों के साथ लंगूर के कटआउट का इस्तेमाल किया गया था।
सिंधु बोलीं- सुनने में मजेदार है, लेकिन कोशिश की तारीफ होनी चाहिए

बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारियों के बीच मंकी व्हिस्परर की खबर ने लोगों का ध्यान खींचा है। भारतीय बैडमिंटन स्टार और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु ने भी इस व्यवस्था पर प्रतिक्रिया दी।
सिंधु का कहना है कि समाधान सुनने में भले ही मजेदार लगे, लेकिन इसके पीछे की कोशिश को देखा जाना चाहिए। भारत में इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी के लिए बड़ी संख्या में लोग पर्दे के पीछे काम कर रहे हैं।
उन्होंने इसे एक तरह का ‘यूनिकली इंडियन’ समाधान बताया। उनके मुताबिक भारत के तरीके कई बार दूसरे देशों से अलग हो सकते हैं, लेकिन उनमें देश की गर्मजोशी, जज्बा और मेहमाननवाजी भी दिखाई देती है।
विदेशी मीडिया ने भी पूछा- दिल्ली में बंदरों का क्या होगा?
बंदरों को लेकर किए गए इन इंतजामों की चर्चा विदेशों में भी हुई है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने इस विषय पर ‘No Monkey Business’ शीर्षक से रिपोर्ट की। इसके अलावा द ट्रिब्यून और द न्यूज मिल ने भी दिल्ली में अपनाए जा रहे इस अनोखे तरीके को रिपोर्ट किया।
अंतरराष्ट्रीय आयोजन से ठीक पहले बंदरों के लिए इस तरह की तैयारी ने एक बार फिर दिल्ली की उस समस्या को सामने ला दिया है, जिससे राजधानी के कई इलाके लंबे समय से जूझते रहे हैं।
कबूतरों ने भी जनवरी में रोका था खेल
इंडिया ओपन के दौरान समस्या सिर्फ बंदरों तक सीमित नहीं थी। स्टेडियम में कबूतरों की मौजूदगी भी आयोजकों के लिए परेशानी बनी थी।
एक मुकाबले के दौरान कोर्ट पर कबूतर की बीट गिरने के बाद खेल रोकना पड़ा था। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में इस तरह की स्थिति दोबारा न आए, इसके लिए इस बार कबूतरों को रोकने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है।
स्टेडियम की छत और डक्टिंग के आसपास अमेरिका से मंगाई गई नॉन-टॉक्सिक पिजन रिपेलेंट जेल लगाई गई है। इसके साथ ऐसी मशीनें भी लगाई गई हैं, जो शिकारी पक्षियों की आवाज निकालती हैं। इन आवाजों से कबूतरों को इलाके में खतरा महसूस होने की उम्मीद है और वे वहां से दूर रहेंगे।
स्टेडियम को नया रूप देने में करीब 20 करोड़ खर्च
वर्ल्ड चैंपियनशिप की मेजबानी के लिए इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में बड़े पैमाने पर रेनोवेशन कराया गया है। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से इस काम पर करीब 20 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।
स्टेडियम में नई और रिफर्बिश्ड कुर्सियां लगाई गई हैं। इमारत की पेंटिंग कराई गई है। वेंट्स को सील किया गया है और प्रवेश व्यवस्था में बदलाव किए गए हैं।
इसके अलावा कोर्ट की लाइटिंग, एयरफ्लो और छत से जुड़ी समस्याओं पर भी काम किया गया है। आयोजकों का फोकस इस बात पर है कि प्रतियोगिता के दौरान किसी भी तरह की छोटी तकनीकी या व्यवस्थागत समस्या मुकाबलों को प्रभावित न करे।
दिल्ली में बंदरों को खाना खिलाने पर भी रोक
दिल्ली में बंदरों की बढ़ती मौजूदगी के पीछे इंसानों द्वारा उन्हें खाना खिलाना भी एक बड़ी वजह मानी जाती है। सार्वजनिक स्थानों पर बंदरों को खाना खिलाने पर रोक है।
दिल्ली हाईकोर्ट भी इस मुद्दे पर टिप्पणी कर चुका है। अदालत ने कहा है कि बंदरों को खाना खिलाने से वे इंसानी बस्तियों की ओर आकर्षित होते हैं और इससे लोगों के लिए परेशानी के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
इसी वजह से राजधानी में बंदरों की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन को लगातार नए तरीके अपनाने पड़ रहे हैं।
17 अगस्त से शुरू होगा टूर्नामेंट
बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप 17 से 23 अगस्त 2026 तक नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित होगी। करीब 17 साल बाद भारत इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी कर रहा है।
खिलाड़ियों की तैयारी अपने स्तर पर चल रही है, वहीं आयोजक स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक तैयार करने में जुटे हैं।
और इस बार स्टेडियम की तैयारियों में एक अनोखा अध्याय भी जुड़ गया है। कोर्ट पर दुनिया के शीर्ष शटलर मुकाबला करेंगे और स्टेडियम के बाहर तीन ‘मंकी व्हिस्परर’ यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि कोई बंदर मैच देखने के लिए अंदर न पहुंच जाए।
अगर प्रतियोगिता के दौरान कहीं से लंगूर की आवाज सुनाई दे, तो दर्शकों को हैरान होने की जरूरत नहीं होगी। यह किसी असली लंगूर की मौजूदगी नहीं, बल्कि दिल्ली में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन को बंदरों से बचाने के लिए अपनाया गया खास इंतजाम होगा।
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