Calcutta High Court on Bengal Leader of Opposition: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी हाथों शिकस्त खाने वाली ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पार्टी तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी (TMC) में बवाल मचा हुआ है। अब ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से भी झटका लगा है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने नेता प्रतिपक्ष रितब्रता बनर्जी (Ritabrata Banerjee) की नियुक्ति पर ममता बनर्जी की टीएमसी को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। रितब्रता बनर्जी बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने रहेंगे। अगली सुनवाई 16 जून को होगी।

बता दें कि ममता बनर्जी की पार्टी में हर दिन विकेट गिरने का दौर जारी है। 60 विधायकों ने अलग गुट बनाकर पार्टी पर दावा ठोक दिया है। वहीं 20 लोकसभा सांसद भी बागी होकर अलग गुट बना चुके हैं। जबकि 13 राज्यसभा सांसदों में से 4 ने इस्तीफा दे दिया है। अब रितब्रता बनर्जी मामले में भी झटका लगा है। स्पीकर द्वारा रितब्रता बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किए जाने के खिलाफ ममता बनर्जी गुट के टीएमसी नेता अदालत पहुंचे थे। हाईकोर्ट ने कोई अंतरिम राहत नहीं दी है।

टीएमसी द्वारा बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में दी गई मान्यता को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह जानना चाहा कि क्या स्पीकर किसी विधायक को उसकी मूल पार्टी की इच्छा के विपरीत नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे सकते हैं या फिर इस मामले में संबंधित राजनीतिक दल की राय और आधिकारिक निर्णय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

स्पीकर ने रितब्रता को LoP की दी है मान्यता

बता दें कि फर्जी साइन मामले के बाद रितब्रता बनर्जी ने टीएमसी के 59 बागी विधायकों के साथ अलग गुट बना लिया है। विधानसभा अध्यक्ष ने इस गुट को मान्यता देते हुए रितब्रता बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया है। इसी के खिलाफ ममता बनर्जी की टीएमसी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कल्याण बंदोपाध्याय ने स्पीकर के एक्शन पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की। हालांकि हाईकोर्ट ने उनके इस मांग को खारिज कर दिया।

जानें क्या है फर्जी साइन का मामला

दरअसल, ये पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अभिषेक बनर्जी ने 9 मई को विधानसभा अध्यक्ष को सूचित किया कि तृणमूल कांग्रेस विधायी दल की बैठक में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष, आशिमा पात्रा और नैना बंद्योपाध्याय को उप नेता प्रतिपक्ष और फिरहाद हाकिम को मुख्य सचेतक नियुक्त करने का फैसला लिया गया है। इसके बाद विधानसभा के प्रधान सचिव ने 18 मई को पत्र लिखकर बैठक का ब्योरा और विधायकों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव मांगा। अभिषेक ने 20 मई को प्रस्ताव पुस्तिका सौंपी, जिसमें दावा किया गया कि 6 मई की बैठक में 70 विधायक मौजूद थे।

इस मामले में नया मोड़ तब आया, जब 27 मई को टीएमसी के ही दो विधायकों रितब्रता बनर्जी (Ritabrata Banerjee) और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष से लिखित शिकायत कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि 6 मई को ऐसा कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ था और उन्होंने केवल 19 मई को ही हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने 6 मई के प्रस्ताव को पूरी तरह मनगढ़ंत और जाली बताया, जिसमें 14 हस्ताक्षर ब्लॉक अक्षरों में थे। इस बगावत के बाद टीएमसी ने दल-विरोधी गतिविधियों के आरोप में इन दोनों विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया था। इसके बाद से टीएमसी के अंदर घमासान मच गया है। रितब्रता बनर्जी और संदीपन साहा के नेतृत्व में 60 विधायकों ने बगावत करते हुए अलट गुट बना लिया। रितब्रता बनर्जी को विधानसभा में एलओपी बनाया गया। वहीं टीएमसी लोकसभा सांसदों ने भी बगावत कर दी। 20 सांसदों ने अलग गुट बना लिया है। जबकि राज्यसभा के 4 सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

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