रामकुमार यादव, सरगुजा। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। इंडियन रॉक पाइथन (अजगर) के मुंह में बनी असामान्य गांठ का सर्जरी के माध्यम से उपचार किया गया। अंबिकापुर के वन्यजीव रेस्क्यूकर्ता सत्यम द्विवेदी की पहल पर अजगर को उपचार के लिए बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी ले जाया गया। यहां विशेषज्ञों की मदद से उसकी सर्जरी की गई।

जानकारी के अनुसार, सत्यम द्विवेदी ने रेस्क्यू के दौरान अजगर के मुंह में असामान्य सूजन देखी। शुरुआत में उन्हें लगा कि संभवतः अजगर ने कोई शिकार निगल लिया है, जिसके कारण उसका मुंह फूला हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि, स्थिति सामान्य नहीं लगने पर उन्होंने ट्यूमर की आशंका जताई। इसके बाद वन विभाग, सरगुजा से आवश्यक अनुमति प्राप्त कर अजगर को बेहतर उपचार के लिए बिलासपुर ले जाया गया।

कानन पेंडारी में वन्यजीव विशेषज्ञ एवं उप संचालक डॉ. चंदन ने अजगर की स्थिति का आकलन किया और बेहतर उपचार के लिए उसे डॉ. पियूष दुबे के पास भेजा। डॉ. पियूष दुबे, जो पेट मेडिक्स के संचालक हैं, ने आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और अपने अनुभव की मदद से अजगर की सर्जरी की। लगभग साढ़े तीन घंटे तक चले ऑपरेशन में उसके मुंह के अंदर बनी गांठ को सर्जरी के माध्यम से निकाल दिया गया।

ऑपरेशन के दौरान अजगर की स्थिति काफी गंभीर बताई गई। सर्जरी के बाद उसे ड्रिप और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता दी गई। चिकित्सकों के अथक प्रयासों से उसकी जान बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली। अब उसके पूर्ण स्वास्थ्य लाभ के लिए निरंतर देखरेख आवश्यक है।
इस मामले को सरीसृपों की चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यदि उपलब्ध वैज्ञानिक अभिलेखों और संबंधित विशेषज्ञों से पुष्टि होती है कि यह देश में अपनी तरह का पहला मामला है, तो यह वन्यजीव चिकित्सा के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि साबित हो सकती है।
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