पंचकूला। आईडीएफसी बैंक से जुड़े 590 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। जांच के दौरान एजेंसी को 200 से अधिक संदिग्ध हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शनों का पता चला है, जिनकी गहन जांच की जा रही है।
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, घोटाले की रकम का इस्तेमाल आरोपियों द्वारा चल-अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया। मामले में सामने आए बयानों के आधार पर कुछ ऐसे बिचौलियों का भी जिक्र हुआ है, जिनका सचिवालय में नियमित आना-जाना बताया जा रहा है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या इन बिचौलियों ने किसी अधिकारी के नाम का दुरुपयोग किया या फिर किसी स्तर पर प्रशासनिक मिलीभगत रही।


फर्जी दस्तावेजों से लेनदेन का आरोप
जांच में सामने आया है कि सरकारी अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए चेक और डेबिट नोट तैयार किए गए। कागजों पर धनराशि को फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के रूप में सुरक्षित दिखाया गया, जबकि असल में यह रकम बैंक सिस्टम से बाहर निकाल ली गई। सीबीआई अब उन बैंक कर्मियों की भूमिका की जांच कर रही है, जिन्होंने इन लेनदेन को मंजूरी दी।


ऑडिट को गुमराह करने की कोशिश
आरोप है कि ऑडिट प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कुछ असली वेंडरों को भी भुगतान किया गया, ताकि लेनदेन सामान्य प्रतीत हो सके। सीबीआई यह भी जांच कर रही है कि क्या किसी तकनीकी विशेषज्ञ या अंदरूनी व्यक्ति की मदद से बैंकिंग सिस्टम में छेड़छाड़ की गई।


डिजिटल साक्ष्य और मनी ट्रेल की जांच
जांच एजेंसी ने आरोपियों के मोबाइल और लैपटॉप से बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा बरामद किया है, जिससे शेल कंपनियों और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का खुलासा हुआ है। वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग के तहत रकम को अलग-अलग चैनलों के जरिए घुमाने की बात भी सामने आई है।


कोर्ट में पेशी और रिमांड
सीबीआई ने सोमवार को पंचकूला की विशेष अदालत में छह आरोपियों को पेश किया। मुख्य आरोपी रिभव ऋषि का दो दिन का अतिरिक्त रिमांड मंजूर किया गया है, जबकि अन्य पांच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
सीबीआई अब फॉरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की पूछताछ कर रही है, ताकि पूरे घोटाले की कड़ियों को जोड़ा जा सके।