अमित पांडेय, खैरागढ़। एक सराफा दुकान के खराब शटर की जानकारी मिली तो नागपुर में बैठे आरोपियों ने चोरी का प्लान तैयार किया, लेकिन वारदात को अंजाम देने के लिए उन्हें वाहन की जरूरत थी। आरोपियों ने पहले नागपुर से स्कूटी चोरी की और उसी चोरी की स्कूटी से छुईखदान पहुंचकर सराफा दुकान को निशाना बना डाला। पुलिस की जांच में चोरी की यह पूरी कड़ी सामने आने के बाद साइबर सेल और छुईखदान पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के मुताबिक, 14 अगस्त की रात छुईखदान के जैन मोहल्ले में सराफा कारोबारी शांतिलाल जैन की दुकान का शटर तोड़कर बड़ी मात्रा में चांदी के आभूषण चोरी किए गए थे। दुकान से करीब 20 से 25 किलो चांदी चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों से पुलिस महेन्द्र साहू तक पहुंची। पूछताछ में सामने आया कि महेन्द्र कुछ समय पहले दुकान पर सामान लेने गया था। इसी दौरान उसने दुकान के शटर में खराबी की बात सुन ली। यही छोटी-सी जानकारी बाद में बड़ी चोरी की साजिश की वजह बन गई। पुलिस के अनुसार, महेन्द्र ने नागपुर जाकर अक्षय गुरूवे और अनिकेत मेश्राम के साथ मिलकर चोरी की योजना बनाई। वारदात के लिए तीनों ने पहले नागपुर से एक स्कूटी चोरी की। इसके बाद उसी चोरी की स्कूटी से नागपुर से छुईखदान पहुंचे और सराफा दुकान को निशाना बनाया।

चोरी से पहले सीसीटीवी के तार काटे

आरोपियों ने वारदात से पहले दुकान की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी। चोरी की रात सीसीटीवी के तार काटे और शटर तोड़कर दुकान में दाखिल हुए। बड़ी मात्रा में चांदी के आभूषण लेकर आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस के मुताबिक, चोरी का माल उन्होंने नवागांव के तालाब में छिपा दिया था, ताकि तत्काल उनके पास से बरामदगी न हो सके। तकनीकी जांच और आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी। इसके बाद नागपुर पहुंचकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनकी निशानदेही पर छिपाकर रखा गया चोरी का माल बरामद कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 22 किलो 600 ग्राम चांदी, 3 ग्राम सोना और घटना में प्रयुक्त होंडा एक्टिवा सहित करीब 44 लाख 75 हजार रुपये का माल बरामद किया है।

पहले भी चोरी की वारदात को दे चुके हैं अंजाम

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि तीनों आरोपी पहले भी चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में शामिल रहे हैं। फिलहाल तीनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। इस पूरी कार्रवाई में साइबर सेल की तकनीकी जांच अहम रही। नागपुर में वाहन चोरी से शुरू हुई कहानी छुईखदान की 44 लाख की सराफा चोरी तक पहुंची और आखिरकार पुलिस की जांच ने दोनों घटनाओं को एक-दूसरे से जोड़ दिया।

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