राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर गुजरात के केवड़िया स्थित एकता नगर में आयोजित भव्य ‘भारत पर्व’ में छत्तीसगढ़ की अनूठी सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्पकला और पर्यटन की विशेष झलक देश-दुनिया के सामने आ रही है। इस राष्ट्रीय आयोजन का शुभारंभ करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र विभिन्न राज्यों के प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के स्टॉल का निरीक्षण किया और बस्तर तथा नारायणपुर से आए पारंपरिक शिल्पकारों से संवाद किया।
प्रधानमंत्री ने पारंपरिक हस्तशिल्प तैयार कर रहे कलाकारों के काम को बेहद करीब से देखा और उनके हुनर की सराहना की। बांस शिल्प सहित अन्य लोककलाओं के निर्माण की प्रक्रिया को लेकर उन्होंने कलाकारों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। छत्तीसगढ़ी परंपरा और आत्मीयता के अनुरूप कलाकारों ने ‘बस्तरिया रेला’ की मनमोहक प्रस्तुति के जरिए प्रधानमंत्री का स्वागत किया, जिसने वहां मौजूद सभी दर्शकों और पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की ओर से भारत पर्व में सजाए गए इस स्टॉल को प्रदेश की समृद्ध कला, संस्कृति और पर्यटन को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान दिलाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। पर्यटन मंडल की प्रतिनिधि डॉ. सुभदा चतुर्वेदी के अनुसार, पंद्रह दिनों तक चलने वाले इस राष्ट्रीय आयोजन में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक हस्तशिल्प कलाओं को प्रमुखता के साथ प्रदर्शित किया जा रहा है।
इस स्टॉल में बस्तर की विश्वप्रसिद्ध डोकरा कला, पारंपरिक लौह शिल्प, खूबसूरत कोसा साड़ियां और बांस से तैयार किए गए विभिन्न आकर्षक उत्पाद मुख्य केंद्र बने हुए हैं। इन उत्कृष्ट कलाकृतियों के माध्यम से देश के कोने-कोने से आने वाले पर्यटकों को छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों की अनूठी रचनात्मकता और समृद्ध शिल्प परंपरा से रूबरू होने का अवसर मिल रहा है।
कला और हस्तशिल्प के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों की आकर्षक जानकारी भी आगंतुकों तक पहुंचाई जा रही है। स्टॉल में चंपारण, चित्रकोट जलप्रपात समेत प्रदेश के तमाम प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन स्थलों तथा आधुनिक रिसॉर्ट्स को खूबसूरती से प्रदर्शित किया गया है। इसके जरिए पर्यटकों को छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीवों और पर्यटन की असीम संभावनाओं की जानकारी मिल रही है।
भारत पर्व जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय आयोजन में छत्तीसगढ़ को मिले इस शानदार मंच से स्थानीय शिल्पकारों और कलाकारों को अपनी कला को व्यापक पहचान दिलाने का सुनहरा अवसर मिल रहा है। इसके साथ ही, प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और पर्यटन संभावनाओं को देशभर के लोगों तक पहुंचाने की दिशा में यह आयोजन मील का पत्थर साबित हो रहा है।
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