प्रतीक शर्मा, लोरमी. बिलासपुर के प्रतिष्ठित अपोलो अस्पताल की मुश्किलें बढ़ते जा रही है. स्वास्थ्य विभाग की अस्पताल में छापेमार कार्रवाई के बाद अब केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखा है. उन्होंने पत्र में अपोलो अस्पताल की नियमों के उल्लंघन और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं देने की शिकायत की है.
दरअसल, लोरमी प्रवास के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि शासन की हर योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना ही उनका प्रयास है. उन्होंने बताया कि अपोलो अस्पताल द्वारा किए जा रहे नियमों के उल्लंघन और मनमानी को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखा गया है.
तोखन साहू ने पत्र में जिक्र किया कि छत्तीसगढ़ और देश के विभिन्न राज्यों से मरीज अपोलो अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं. यहां आयुष्मान और खूबचंद बघेल स्कीम जैसी विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ न मिलने से गरीब परिवारों को भारी मानसिक के साथ-साथ आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से कड़े निर्देश जारी करने की मांग की है.
दो दिन पहले स्वास्थ्य विभाग ने मारा था छापा
रायपुर और बिलासपुर से स्वास्थ्य अधिकारी-कर्मचारियों की संयुक्त टीम ने 11 जुलाई को बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में जांच के लिए पहुंची थी. कार्रवाई के दौरान अस्पताल में मरीजों के इलाज से जुड़े दस्तावेज, भर्ती और उपचार की प्रक्रिया, चिकित्सा रिकॉर्ड के साथ-साथ अस्पताल के आय-व्यय का भी बारीकी से परीक्षण किया गया.
एयरपोर्ट पहुंचाने के लिए नहीं दी अस्पताल की एंबुलेंस
अपोलो अस्पताल में भर्ती एक गंभीर मरीज को हैदराबाद रेफर करने की प्रक्रिया के दौरान अस्पताल प्रबंधन पर कथित लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं. मरीज के परिजनों का दावा है कि समय पर समुचित चिकित्सा समन्वय नहीं होने के कारण एयर एंबुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद मरीज को उसी दिन हैदराबाद नहीं भेजा जा सका. इससे मरीज की हालत और गंभीर हुई.
पीडब्ल्यूडी विभाग में कार्यरत राजकुमार अग्रवाल लगभग 12 दिन पहले दोस्तों के साथ कोलकाता घूमने गए थे. यात्रा के दौरान उनकी तबीयत खराब होने लगी. बिलासपुर लौटने के बाद उन्होंने स्थानीय चिकित्सकों से इलाज कराया, लेकिन हालत में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया. बुधवार दोपहर डाक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए उन्हें हायर सेंटर रेफर करने की सलाह दी. इसके बाद स्वजन ने लगभग 13 लाख रुपये खर्च कर हैदराबाद के लिए एयर एंबुलेंस बुक की, जो बुधवार शाम करीब सात बजे चकरभाठा एयरपोर्ट पहुंच गई.
आरोप है कि मरीज को एयरपोर्ट ले जाने के लिए अस्पताल की एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई. अस्पताल परिसर में एंबुलेंस होने के बावजूद उन्हें निजी एंबुलेंस की व्यवस्था करने के लिए कहा गया. साथ ही मरीज के साथ अस्पताल की ओर से न तो कोई डाक्टर भेजा गया और न ही कोई प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ मौजूद था. एयरपोर्ट पहुंचने पर मरीज की तबीयत बिगड़ गई, डाॅक्टरों की टीम ने हैदराबाद ले जाने से इनकार कर दिया. इस वजह से मरीज को वापस अपोलो लाना पड़ा.
देर रात अस्पताल में चिकित्सकों ने मरीज के लिए विशेष फेफड़ा (लंग्स) सपोर्ट सिस्टम और नई विशेषज्ञ मेडिकल टीम की आवश्यकता बताई. गुरुवार को सुबह हैदराबाद से तीन सदस्यीय टीम अपोलो पहुंची. पूरे दिन मरीज को स्थिर करने के बाद शाम करीब सात बजे उसे दोबारा एयर एंबुलेंस से हैदराबाद रवाना किया गया. हालांकि इस बार भी निजी एंबुलेंस का इस्तेमाल किया गया, लेकिन हैदराबाद से आई टीम ने पहले एंबुलेंस और उसकी चिकित्सा व्यवस्था की जांच की, उसके बाद ही मरीज को एयरपोर्ट ले जाने की अनुमति दी.

Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H

