पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद. गरियाबंद जिले में मंडी निधि से कराए गए सीसी सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. वर्ष 2025 में बिंद्रानवागढ़ क्षेत्र के विभिन्न गांवों में 22 सीसी सड़कों के निर्माण के लिए करीब 3 करोड़ 79 लाख 48 हजार रुपये की मंजूरी दी गई थी. टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ठेका कंपनियों को अगस्त 2025 से कार्य आदेश भी जारी कर दिए गए. इनमें कुछ सड़कों का काम पूरा हो चुका है, जबकि कुछ कार्य अब तक शुरू भी नहीं हो सके हैं. हैरानी की बात यह है कि पूर्ण बताए गए कई सड़क निर्माण कार्यों में ही बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जिससे गांवों के मुहाने पर बनी इन सड़कों पर वाहनों की आवाजाही तक बंद हो गई है. वहीं, इन सभी कार्यों की निगरानी राजधानी रायपुर स्थित संभागीय मंडी बोर्ड कार्यालय से किया जा रहा है, जिससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और मौके पर निरीक्षण को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.

धौराझोला मार्ग पर भारी वाहन हुआ अवरुद्ध 

मूढ़गेल माल से धौराझोला जाने वाले मार्ग पर 351 मीटर लंबी सीसी सड़क का निर्माण मेसर्स आशीष यादव द्वारा करीब 5 महीने पहले किया गया था. 10 लाख 61 हजार रुपये की लागत से बनी इस सड़क में महज दो महीने के भीतर ही जगह-जगह दरारें पड़ गईं. दरअसल, इस मार्ग पर PMGSY के तहत पक्की सड़क स्वीकृत है, लेकिन शुरुआती 351 मीटर हिस्से में मंडी बोर्ड द्वारा बनाई गई सीसी सड़क अब मुख्य मार्ग की कनेक्टिविटी में बाधा बन रही है. इस हिस्से से निर्माण सामग्री और भारी वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है. सड़क में कम समय में आई दरारों को लेकर ग्रामीणों में काफी नाराजगी है. उनका कहना है कि मंडी बोर्ड की खराब गुणवत्ता वाली सड़क के कारण एक ओर PMGSY सड़क की लंबाई प्रभावित हुई है.

कई सड़कों में दरारे, कुछ हैं अधूरे

जानकारी के मुताबिक, धौरा झोला के अलावा खरीपथरा, तुहामेटा, आमदी, भरवामुडा समेत 11 सड़कों में दरारें पड़ गई है. जबकि छैल डोंगरी, गौहरापदर समेत 5 सड़कों का काम अधूरा छोड़ दिया गया है. किसी भी सड़क में सूचना बोर्ड नहीं है, जिससे पारदर्शिता के लिए किए गए जरूरी प्रवधान का भी उल्लंघन किया गया है.

मॉनिटरिंग का अभाव, इसलिए सड़कों में दरारें 

ग्रामीण इलाकों में बनने वाले सीसी सड़क में स्थल का चयन गुणवत्ता को प्रभावित करता है. काली मिट्टी वाले स्थानों पर बनने वाले सड़कों में बेस के काम में मापदंड का पालन नहीं किया गया. नियमों के मुताबिक इन स्थानों पर मुरम डाल कर कॉम्पेक्शन या पानी की तराई कर मुरम की पटाई अच्छे से किया जाना था. चूंकि मंडी बोर्ड की तकनीकी शाखा संभाग स्तर पर रायपुर दफ्तर से मॉनिटरिंग करती है. ऐसे में सीमित लोगों द्वारा जिले में मंजूर 44 से ज्यादा कार्यों की मॉनिटरिंग सही ढंग से नहीं किया गया.

निधि के रुपये की बर्बादी का आरोप

कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने कहा मंडी निधि किसानों से जुड़ी सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए खर्च करने का प्रावधान है. बेसरा ने कहा कि मैं स्वयं मंडी उपाध्यक्ष था. पूर्व की सरकार इस निधि को मंडी के सुविधाओं पर केंद्रित कर खर्च कर रही थी, लेकिन अब जिम्मेदार लोगों द्वारा अपने नेताओं की खुश करने इस निधि का कहीं भी काम मंजूर कर दिया गया है. मंजूर सारे कार्यों की समीक्षा की जानी चाहिए. कमीशनखोरी और बंदरबांट के चलते गुणवत्ता प्रभावित हुआ है. मनमानी की जांच होनी चाहिए.

काम पूरा नहीं करने वालों को भेजा जा रहा नोटिस : मंडी बोर्ड एसडीओ

मंडी बोर्ड के एसडीओ कमल यादव ने कहा कि अभी ज्वाइनिंग करने के कारण मुझे फील्ड की ज्यादा जानकारी नहीं है. अगर कहीं गुणवत्ता खराब है, तो फील्ड जा कर जल्द ही कार्य का निरक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. जिन्होंने काम पूर्ण नहीं किया उन्हें भी नए सिरे से नोटिस भेजा जा रहा है.

बोर्ड डायरेक्टर को पत्र लिखेंगे मंडी सचिव

इस मामले में गरियाबंद मंडी के सचिव दिनेश बंजारे ने कहा कि इस निधि का खर्च मंडी विकास, किसान से जुड़े कार्य और किसानों के आवाजाही में सुविधाओं पर खर्च किया जाना है. जो काम मंजूर है, वह किसानों के सुविधाओं  के आधार पर होगा. चूंकि अभी मीडिया द्वारा कई बिंदुओं पर जानकारी मिली है. निरीक्षण कर तकनीकी शाखा और बोर्ड के डायरेक्टर को पत्र लिखूंगा.  

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