रायपुर। घर के मासिक बजट को बिगाड़ने वाला बिजली का बिल और हर महीने मीटर की रीडिंग के साथ बढ़ते बिल का हिसाब परिवारों के लिए गहन चिंता का विषय हुआ करता था, मगर आज वही तस्वीर बदल रही है। छत्तीसगढ़ के हजारों घरों की छतों पर सूरज की रोशनी बिजली में परिवर्तित हो रही है। कल तक बिजली के उपभोक्ता रहे परिवार आज खुद ‘ऊर्जादाता’ बनने की दिशा में अग्रसर हैं। यह परिवर्तन प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से आकार पा रहा है और प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ इस बदलाव को नई रफ्तार दे रहा है।

सूरज की रोशनी से बिखर रही आत्मनिर्भरता की रोशनी
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की मूल भावना जितनी सरल है, उसका प्रभाव उतना ही व्यापक है। सरल सा संदेश है- अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगाइए, सूर्य की ऊर्जा से विद्युत पैदा कीजिए और अपने बिजली खर्च को कम कीजिए। इस योजना के लिए पात्र परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ मिल सकता है। केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी से पहले की तुलना में काफी किफायती हुआ है रूफटॉप सोलर प्लांट लगाना। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह नागरिक को केवल सरकारी सहायता का लाभार्थी बनाने के साथ ही साथ उन्हें ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी देती है। देश के प्रधानमंत्री की इस सोच को बल देती छत्तीसगढ़ के मुखिया की सोच विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को जमीनी स्तर पर मजबूत कर रही है।
प्रदेश में इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है। वर्तमान में उपलब्ध राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक लगभग 95 हजार घर सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं। इस योजना के लिए लोगों के उत्साह का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1.80 लाख से अधिक आवेदन CSPDCL को मिल चुके हैं। छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने मार्च 2027 तक 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का टारगेट रखा है।
CM साय की विकास दृष्टि में काफी महत्व रखता है राज्य में ऊर्जा आत्मनिर्भरता

गांव के गरीब, किसान और आम परिवारों के जीवन में प्रत्यक्ष रूप से राहत पहुंचाने वाली योजनाओं में एक है प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना। इस योजना को छत्तीसगढ़ में गति देना प्रदेश के मुख्यमंत्री की विकास दृष्टि का अहम हिस्सा है। राज्य के जन नायक ‘विष्णु देव साय’ के नेतृत्व में सरकार का प्रयास है कि विकास की सुखदाई हवा से सिर्फ बड़े शहर ही लाभान्वित न रहें, बल्कि सुख का यह झोंका गांव-गांव तक पहुंचे। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की गांव-गांव तक पहुंच, इसी सोच को साकार करती है। इस योजना से लाभान्वित परिवार बिजली के खर्च को कम करते हुए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत को बढ़ा रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अपना योगदान दे रहे हैं। इस एक योजना के कई फायदे हैं, बचत भी, स्वच्छ ऊर्जा भी और आत्मनिर्भरता भी।
छत्तीसगढ़ में मिल रहा सब्सिडी का मजबूत सहारा

छत्तीसगढ़ के उपभोक्ता इस योजना से केंद्र सरकार की सब्सिडी के साथ राज्य सरकार की अतिरिक्त सब्सिडी का लाभ उठा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में इस अतिरिक्त लाभ के चलते रूफटॉप सोलर अपनाने की राह आम परिवारों के लिए अधिक आसान हो गई है। एक किलोवाट के सोलर प्लांट पर केंद्र की ओर से 30 हजार रुपये और राज्य की ओर से 15 हजार रुपये की सब्सिडी, कुल मिलाकर 45 हजार रुपये का लाभ मिलता है। दो किलोवाट पर केंद्र की ओर से 60 हजार रुपये और राज्य की तरफ से 30 हजार रुपये की सब्सिडी मिलाकर कुल 90 हजार रुपये का लाभ उपलब्ध है। तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता पर केंद्र की अधिकतम सब्सिडी 78 हजार रुपये और राज्य की ओर से 30 हजार रुपये की सब्सिडी से अधिकतम कुल 1 लाख 8 हजार रुपये तक का लाभ मिल सकता है। मिलने वाली यह आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना को मध्यमवर्गीय, ग्रामीण और शहरी परिवारों के लिए खासा आकर्षक बनाती है। बैंक ऋण और आसान EMI जैसी सुविधाएं भी सोलर प्लांट लगाने की आरंभिक लागत को वहन करने में सहायक साबित हो रही हैं।
बिजली बिल शून्य हुआ तो बदल गई सोच
गरियाबंद जैसे प्रदेश के कई क्षेत्रों से सामने आ रही उपभोक्ताओं की प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि सौर ऊर्जा तकनीक के साथ घरेलू अर्थव्यवस्था में भी बदलाव का माध्यम बन रही है।
हर महीने बिजली बिल की चिंता में डूबे रहने वाले परिवार अब अपनी छत पर बिजली पैदा कर रहे हैं। इस योजना से जुड़े कई उपभोक्ताओं का बिजली बिल लगभग शून्य तक जा पहुंचा है। बिजली बिल से बचने वाली रकम का उपयोग उपभोक्ता परिवार शिक्षा, स्वास्थ्य, खेती, घरेलू जरूरतों या अन्य जरूरी कामों में कर रहा है। छत पर लगा सोलर पैनल बिजली पैदा करने के साथ परिवार के बजट में भी नई जगह बना रहा है।
सक्ती के किसान राजकुमार मनहर की कहानी

सक्ती जिले के गांव जर्वे के किसान राजकुमार मनहर इस परिवर्तन की एक प्रेरक और शानदार मिसाल बन गए हैं। राजकुमार मनहर ने जून 2025 में अपने घर की छत पर 2 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित कराया था, जिसकी लागत लगभग 1 लाख 26 हजार रुपये की थी। उन्हें केंद्र सरकार से 60 हजार रुपये की सब्सिडी मिल चुकी है और राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये की सब्सिडी मिलने की प्रक्रिया जारी है।
सोलर पैनल लगने के बाद उनके बिजली बिल में बड़ा बदलाव देखने को मिला। पहले उनका बिजली बिल जो हर महीने लगभग 300 से 400 रुपये तक आता था, वही अब शून्य हो गया है।
राजकुमार मनहर के लिए यह आत्मनिर्भरता के अनुभव के साथ होने वाली बचत है। राजकुमार मनहर ने इसे किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए क्रांतिकारी योजना बताया है। उनकी कहानी बताती है कि गांव के सामान्य परिवार तक पहुंचने वाली ऊर्जा ही दरअसल वास्तविक ऊर्जा क्रांति है।
सभी को मिल रहा है उपभोक्ता से ऊर्जादाता बनने का अवसर
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उपभोक्ता केवल अपनी बिजली की जरूरत पूरी करने के विषय में नहीं सोचता, बल्कि वह सोलर सिस्टम से अधिक बिजली पैदा कर नेट मीटरिंग के माध्यम से अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजने की सोचता है, ताकि वह ऊर्जा उत्पादन की पूरी प्रक्रिया में भागीदार बन सके। सोलर पैनल से आने वाला यही बदलाव ‘उपभोक्ता’ और ‘ऊर्जादाता’ के बीच की दूरी को खत्म करता है।
एक घर की छत से होता हुआ सोलर पैनल धीरे-धीरे हजारों और लाखों घरों की छतों तक जा पहुंचा है। सोलर पैनल के इस बढ़े हुए जाल का प्रभाव बिजली के क्षेत्र में तो दिखाई देता ही है, इसके अलावा इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है, पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर दबाव कम होता है और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है।
अब दिखने लगी है गांव से शहर तक हर छत में सौर शक्ति
छत्तीसगढ़ में भरपूर गांव भी हैं और बड़े शहर भी। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना इन दोनों क्षेत्रों के परिवारों को एक साझा अवसर दे रही है। अपने घर की छत को ऊर्जा उत्पादन का माध्यम बनाने का अवसर पाकर सभी खुश और उत्साहित हैं। प्रदेश में इस योजना का क्रियान्वयन CSPDCL द्वारा किया जा रहा है। पंजीयन और योजना से जुड़ी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पारदर्शिता के साथ की जा रही है। प्रधानमंत्री सूर्यघर पोर्टल, मोबाइल ऐप, CSPDCL की वेबसाइट, मोर बिजली ऐप और टोल-फ्री नंबर 1912 के माध्यम से उपभोक्ता योजना की जानकारी ले सकते हैं और आवेदन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं। तमाम सब्सिडी के अलावा, पंजीकृत वेंडर्स के माध्यम से स्थापित सोलर सिस्टम पर पांच वर्ष की व्यापक रखरखाव सेवा का प्रावधान भी है, जो उपभोक्ताओं के भरोसे को मजबूत करने वाला है।

5 लाख घरों के लक्ष्य के साथ हो रही बड़े बदलाव की शुरुआत
मार्च 2027 तक 5 लाख घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य छत्तीसगढ़ सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ की साय सरकार इस अभियान को केवल एक योजना के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक ऊर्जा परिवर्तन के रूप में देख रही है। लगभग 95 हजार घरों का सौर ऊर्जा से जुड़ना इस यात्रा की शानदार शुरुआत कही जा सकती है। 1.80 लाख से अधिक प्राप्त आवेदन इस बात का प्रमाण है कि जनता भी इस बदलाव को तहदिल से स्वीकार कर रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जन-जन के विष्णु भैया के नेतृत्व में यह प्रयास यदि इसी गति से आगे बढ़ता रहा तो निश्चित ही आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की लाखों छतें बिजली उत्पादन के छोटे-छोटे केंद्र बन जाएंगी।
विकास की नई परिभाषा—बचत, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता
किसी भी शासकीय योजना की सफलता को तभी वास्तविक माना जा सकता है, जब उसका लाभ कागज से निकलकर आम आदमी के जीवन में दिखाई दे। पीएम सूर्यघर योजना में यही संभावना नजर आती है कि इस योजना का लाभ हर परिवार को सीधे-सीधे मिल सकेगा। इस योजना का चौतरफा लाभ परिवार को मिल रहा है। एक तरफ परिवार को बिजली खर्च में राहत मिल रही है, दूसरी तरफ स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार हो रहा है, तीसरी तरफ ऊर्जा आत्मनिर्भरता है और चौथी तरफ अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजने का अवसर है।
विकास के कई आयामों को एक साथ जोड़ने वाली इस योजना को छत्तीसगढ़ की धरती पर गति देने में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है। घर की छत पर लगा सोलर पैनल आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद बन रहा है। कल तक बिजली खरीदने वाले परिवार आज बिजली पैदा कर रहे हैं। बिजली का बिल भरने की चिंता अब बचत की सोच में बदल रही है। कल के बिजली के उपभोक्ता आज ‘ऊर्जादाता’ बनने की राह पर हैं। यह परिवर्तन ही सौर क्रांति है और यही उस छत्तीसगढ़ की तस्वीर भी है, जहां विष्णु देव साय के नेतृत्व में विकास की रोशनी, घर की छत से होकर जीवन तक पहुंच रही है।
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